रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। क्रेमलिन के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने की दिशा में मध्यस्थता करने की पेशकश की है। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम बातचीत हुई।
क्रेमलिन के प्रेस सेक्रेटरी दिमित्री पेस्कोव ने रविवार को बताया कि भारत मंडपम में ब्रिक्स समिट के दौरान पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय बातचीत में मोदी और शी ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान में मदद करने की इच्छा जताई। दोनों नेताओं ने बातचीत के जरिए विवाद का समाधान खोजने में अपनी दिलचस्पी जाहिर की और इसके लिए सक्रिय रूप से मध्यस्थता की पेशकश की।
पेस्कोव के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोनों नेताओं की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग को रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। रूस की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि भविष्य में बातचीत की मेज पर लौटने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। कई देशों ने युद्ध को खत्म करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की है। ऐसे में भारत और चीन जैसे बड़े देशों की ओर से मध्यस्थता की पेशकश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर देते रहे हैं। भारत का रुख रहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए निकाला जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी रूस और यूक्रेन दोनों के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत कर चुके हैं और कई मौकों पर शांति की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं।
दूसरी तरफ चीन भी रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए राजनीतिक समाधान की बात करता रहा है। ऐसे में मोदी और शी की ओर से एक साथ मध्यस्थता की पेशकश किए जाने की खबर इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना देती है।
बताया गया है कि दोनों नेताओं ने अपनी द्विपक्षीय बैठकों के दौरान यूक्रेन मामले के समाधान में गहरी दिलचस्पी दिखाई। क्रेमलिन के अनुसार, उन्होंने समाधान खोजने में मदद के लिए अपनी सक्रिय भूमिका की पेशकश की। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मध्यस्थता की यह पेशकश किस औपचारिक प्रारूप में होगी और रूस, यूक्रेन तथा अन्य पक्षों के बीच बातचीत की संभावित प्रक्रिया क्या होगी।
पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुई इस बातचीत को भी काफी अहम माना जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति शुक्रवार से भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर थे। इस दौरान भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों के अलावा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत और चीन वास्तव में रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म कराने के लिए किसी औपचारिक मध्यस्थता प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। फिलहाल क्रेमलिन की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं ने समाधान खोजने में मदद करने की इच्छा जताई है और राष्ट्रपति पुतिन ने इस पहल का स्वागत किया है।
अगर भविष्य में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत दोबारा शुरू होती है, तो भारत और चीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस और यूक्रेन की सहमति सबसे अहम होगी। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि मोदी और शी की इस कथित पहल के बाद रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर कूटनीतिक स्तर पर क्या नया कदम सामने आता है।


