बांग्लादेश और भारत के बीच बढ़ते तनाव के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बांग्लादेश को भारत के झारखंड स्थित गोड्डा पावर प्लांट से मिलने वाली बिजली में अचानक बड़ी कमी आ गई। अडानी पावर के 1600 मेगावाट क्षमता वाले गोड्डा प्लांट से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति की जाती है, ऐसे में सप्लाई में कमी का सीधा असर वहां की बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है।
बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में हैं। राजनीतिक बयानबाजी से लेकर व्यापार और ऊर्जा सहयोग तक, दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनाव देखने को मिला है। इसी बीच बांग्लादेश की ओर से भारत के साथ हुए कई समझौतों की समीक्षा या उन्हें रद्द करने की बातें सामने आने के बाद बिजली आपूर्ति में आई कमी ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
गोड्डा स्थित अडानी पावर प्लांट की कुल क्षमता 1600 मेगावाट है और इसकी बिजली बांग्लादेश को सप्लाई की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक प्लांट की 800 मेगावाट क्षमता वाली एक यूनिट के ट्रिप होने के कारण बांग्लादेश को मिलने वाली बिजली में भारी कमी आई। इसके बाद वहां बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की खबरें सामने आईं।
हालांकि इस घटना को सीधे तौर पर भारत की ओर से जानबूझकर बिजली सप्लाई रोकने की कार्रवाई कहना सही नहीं होगा। किसी पावर यूनिट का ट्रिप होना तकनीकी कारणों से भी हो सकता है और जब तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट न हो कि यूनिट क्यों बंद हुई, तब तक इसे किसी कूटनीतिक फैसले से जोड़ना महज दावा ही रहेगा।
फिर भी बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण है। बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने पर उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और आम उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब किसी देश की बिजली व्यवस्था पहले से दबाव में हो, बड़ी मात्रा में बिजली आपूर्ति में अचानक कमी परेशानी बढ़ा सकती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग कई वर्षों से दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारत से मिलने वाली बिजली बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था में योगदान देती है। वहीं बांग्लादेश के लिए लगातार और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति आर्थिक गतिविधियों के लिए भी जरूरी है।
यही वजह है कि गोड्डा पावर प्लांट से जुड़ी हर बड़ी तकनीकी या परिचालन संबंधी घटना का असर सिर्फ बिजली व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके कूटनीतिक मायने भी निकाले जाने लगते हैं। खासकर जब दोनों देशों के बीच पहले से राजनीतिक तनाव मौजूद हो।
भारत के लिए भी बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और सीमा से जुड़े कई हित जुड़े हुए हैं। इसलिए बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में किसी भी बदलाव को बेहद सावधानी से देखा जाता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोड्डा प्लांट की बंद हुई यूनिट कितनी जल्दी दोबारा चालू होती है और बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति कब सामान्य होती है। अगर तकनीकी समस्या जल्द दूर हो जाती है तो इसे सामान्य परिचालन घटना माना जा सकता है। लेकिन अगर बिजली संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर दोनों देशों के बीच पहले से चल रही कूटनीतिक खींचतान पर भी पड़ सकता है।
यानी बांग्लादेश और भारत के बीच बिजली सिर्फ ऊर्जा का मुद्दा नहीं है। यह दोनों देशों की आर्थिक निर्भरता और रणनीतिक रिश्तों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में गोड्डा पावर प्लांट की घटना पर अब दोनों देशों की नजर बनी हुई है।


