पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल मसूद अजहर को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA ने अपनी 2026 की सबसे वांछित आतंकवादियों की सूची में मसूद अजहर का नाम शामिल किया है। इतना ही नहीं, उसे पकड़ने में मदद करने वाली जानकारी देने वाले व्यक्ति के लिए इनाम की रकम भी बढ़ा दी गई है।
पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर मिलने वाले इनाम को 20 लाख पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। इस घोषणा के बाद पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया कि वह मसूद अजहर को पकड़ने के लिए कार्रवाई कर रहा है। लेकिन भारत ने पाकिस्तान के इस कदम को गंभीरता से लेने के बजाय इसे महज दिखावा और लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश बताया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस तरह के हथकंडे अपनाना कोई नई बात नहीं है। भारत पहले भी ऐसी घोषणाएं और कोशिशें देख चुका है, जिनका जमीन पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
भारत का कहना है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश की ओर से आतंकियों के खिलाफ ऐसी घोषणाएं कितनी खोखली हैं, यह दुनिया अच्छी तरह जानती है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ संदेश दिया कि अगर पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है तो उसे सिर्फ इनाम की रकम बढ़ाने या सूचियां जारी करने के बजाय जमीन पर ठोस कदम उठाने चाहिए।
मसूद अजहर का नाम भारत के लिए बेहद संवेदनशील है। जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख होने के कारण उस पर भारत में कई बड़े आतंकी मामलों से जुड़े होने के आरोप हैं। वह लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसे आतंकवाद से जुड़े मामलों के कारण प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है।
पाकिस्तान की एजेंसी द्वारा मसूद अजहर को अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करना पहली नजर में बड़ा कदम दिखाई देता है। लेकिन भारत सवाल उठा रहा है कि अगर पाकिस्तान वास्तव में उसे गिरफ्तार करना चाहता है तो अब तक उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सिर्फ इनाम की राशि बढ़ाने से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई साबित नहीं होती।
रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को यह भी संदेश दिया कि ऐसी घोषणाओं का कोई मतलब नहीं है, अगर उनके पीछे वास्तविक कार्रवाई नहीं होती। भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का दबाव बनाता रहा है।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान का 70 लाख रुपये का इनाम वास्तव में मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत है या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने की एक कोशिश? फिलहाल भारत ने पाकिस्तान की घोषणा को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है।
भारत का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ बयान और इनाम की घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। इसलिए अब नजर इस बात पर रहेगी कि पाकिस्तान मसूद अजहर के खिलाफ वास्तव में क्या कदम उठाता है और उसकी यह घोषणा जमीन पर कितना असर दिखाती है।


