उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया जा रहा एक नवजात रास्ते में ही मुश्किल में पड़ गया। बच्चे को लेकर जा रही 108 एंबुलेंस अचानक बंद हो गई। उसे दोबारा चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान ट्रैफिक पुलिस के एक सिपाही ने बच्चे और उसके परिजन को अपनी बाइक पर बैठाकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां नवजात का इलाज शुरू किया गया।
जानकारी के मुताबिक, नवजात शिशु की हालत गंभीर होने के कारण उसे मानिकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी CHC से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। इसके लिए 108 एंबुलेंस की मदद ली गई। परिवार को उम्मीद थी कि बच्चे को समय पर अस्पताल पहुंचाकर बेहतर इलाज मिल सकेगा, लेकिन रास्ते में अचानक एंबुलेंस बंद हो गई।
बताया जा रहा है कि एंबुलेंस चित्रकूट के एलआईसी चौराहे के पास पहुंची थी, तभी वह चलते-चलते रुक गई। वाहन बंद होने के बाद उसमें सवार नवजात और उसके परिजन की परेशानी बढ़ गई। बच्चे की हालत पहले से गंभीर बताई जा रही थी, ऐसे में अस्पताल पहुंचने में हो रही देरी चिंता का कारण बन गई।
एंबुलेंस को दोबारा चालू करने के लिए आसपास मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने धक्का लगाने की कोशिश की। काफी प्रयास के बावजूद वाहन स्टार्ट नहीं हो सका। इस दौरान नवजात को जल्द से जल्द जिला अस्पताल पहुंचाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।
इसी बीच मौके पर मौजूद ट्रैफिक सिपाही अजय यादव ने आगे आकर मदद की। उन्होंने नवजात और उसके परिजन को अपनी बाइक पर बैठाया और जिला अस्पताल की ओर रवाना हो गए। सिपाही की इस पहल से बच्चे को अस्पताल पहुंचाने का रास्ता बना और वहां समय पर इलाज शुरू हो सका।
इस घटना के बाद 108 एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गंभीर मरीजों और नवजात बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में एंबुलेंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बीच रास्ते वाहन बंद हो जाने की घटना आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों और वाहनों के रखरखाव पर ध्यान देने की जरूरत को सामने लाती है।
हालांकि, एंबुलेंस किस तकनीकी कारण से बंद हुई, वाहन की स्थिति क्या थी और इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। घटना की पूरी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन में खराबी के पीछे क्या कारण था और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
चित्रकूट की इस घटना में ट्रैफिक सिपाही अजय यादव की तत्परता से नवजात को जिला अस्पताल पहुंचाने में मदद मिली। वहीं, यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का नियमित रखरखाव और समय पर तकनीकी जांच कितनी जरूरी है।
फिलहाल, नवजात को जिला अस्पताल पहुंचाए जाने और इलाज शुरू होने की जानकारी सामने आई है। बच्चे की आगे की स्वास्थ्य स्थिति और एंबुलेंस की खराबी को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।


