हमारे शरीर में एक प्राकृतिक 24 घंटे की आंतरिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर के सोने-जागने के चक्र, हार्मोन के स्राव और दिनभर की सक्रियता को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस आंतरिक घड़ी को नियमित रखने में प्रकाश, खासकर प्राकृतिक रोशनी, का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए सुबह और शाम के समय मिलने वाली प्राकृतिक रोशनी को समझना उपयोगी हो सकता है।
सुबह की प्राकृतिक रोशनी शरीर की आंतरिक घड़ी को दिन की शुरुआत का संकेत देने में मदद करती है। सुबह उठने के बाद बाहर की प्राकृतिक रोशनी आंखों तक पहुंचने पर शरीर के सर्केडियन सिस्टम को समय के अनुसार सक्रिय होने का संकेत मिलता है। इससे दिन में सतर्कता और रात में सही समय पर नींद आने वाले चक्र को नियमित रखने में मदद मिल सकती है।
सुबह की धूप को विटामिन डी से भी जोड़ा जाता है, लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि विटामिन डी का निर्माण मुख्य रूप से त्वचा पर पड़ने वाली पराबैंगनी बी यानी यूवीबी किरणों से होता है। इसकी मात्रा मौसम, स्थान, त्वचा के प्रकार, कपड़ों और दिन के समय के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए केवल सुबह की धूप को विटामिन डी का निश्चित स्रोत मानना सही नहीं होगा।
शाम की प्राकृतिक रोशनी की भूमिका थोड़ी अलग होती है। दिन ढलने के समय प्रकाश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होती है और शरीर को रात के करीब आने के संकेत मिलने लगते हैं। हालांकि यह कहना सही नहीं है कि शाम की धूप सीधे मेलाटोनिन हार्मोन को बढ़ाती है। बल्कि शाम के समय तेज कृत्रिम रोशनी, खासकर मोबाइल और कंप्यूटर की तेज स्क्रीन लाइट, कम रखना शरीर के प्राकृतिक मेलाटोनिन स्राव और नींद के चक्र के लिए अधिक मददगार हो सकता है।
यही वजह है कि दिन के दौरान पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी लेना और रात में रोशनी को धीरे-धीरे कम करना नींद के नियमित चक्र के लिए उपयोगी आदत मानी जाती है। सुबह प्राकृतिक प्रकाश लेना और शाम को कुछ समय बाहर की हल्की प्राकृतिक रोशनी में बिताना शरीर की आंतरिक घड़ी को नियमित संकेत देने में मदद कर सकता है।
अगर आपका सोने और जागने का समय अक्सर बदलता रहता है, रात में देर तक मोबाइल चलाने की आदत है या सुबह उठने के बाद लंबे समय तक कमरे में अंधेरा रहता है, तो आपकी सर्केडियन रिदम प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सुबह प्राकृतिक रोशनी लेना और रात के समय तेज स्क्रीन लाइट कम करना उपयोगी हो सकता है।
धूप लेते समय सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है। तेज धूप में लंबे समय तक सीधे सूर्य की ओर देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वहीं बहुत ज्यादा पराबैंगनी विकिरण त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए धूप लेने का समय और अवधि मौसम, स्थान और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार रखना चाहिए।
कुल मिलाकर सुबह और शाम की प्राकृतिक रोशनी का उद्देश्य एक जैसा नहीं है। सुबह की रोशनी शरीर की आंतरिक घड़ी को दिन के लिए सक्रिय करने में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है, जबकि शाम के समय प्राकृतिक रोशनी से धीरे-धीरे कम होती रोशनी शरीर को रात के लिए तैयार होने वाले वातावरण का हिस्सा बनती है। बेहतर नींद के लिए नियमित सोने-जागने का समय, दिन में पर्याप्त प्राकृतिक प्रकाश और रात में कम रोशनी रखना एक साथ ज्यादा महत्वपूर्ण है।

