एशियाई खेल 2026 में भारतीय निशानेबाज अनंतजीत सिंह नरूका और परिनाज धालीवाल की जोड़ी ने स्कीट मिश्रित टीम स्पर्धा में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीत लिया। शुरुआती दौर में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद भारतीय जोड़ी ने शानदार वापसी की और अंतिम चरण तक मुकाबले में बनी रही। यह एशियाई खेलों की स्कीट मिश्रित टीम स्पर्धा में भारत का पहला पदक है।
भारतीय जोड़ी की शुरुआत कुछ खास नहीं रही। क्वालीफिकेशन के पहले दौर में नरूका और परिनाज ने 50 में से 44 निशाने साधे। खराब शुरुआत के बाद भी दोनों निशानेबाजों ने हिम्मत नहीं खोई। उन्होंने एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाया और तय किया कि अभी दो और दौर बाकी हैं, इसलिए अंतिम निशाने तक मुकाबला जारी रखना है।
दूसरे दौर में भारतीय जोड़ी ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और 47 निशाने साधे। तीसरे दौर में भी उन्होंने 47 निशाने लगाकर कुल 138 अंक हासिल किए। इस प्रदर्शन के दम पर भारत ने चार टीमों वाले फाइनल में जगह बनाई। क्वालीफिकेशन के दौरान दोनों खिलाड़ियों के बीच लगातार यही संदेश रहा कि परिणाम की चिंता किए बिना अंतिम निशाने तक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।
परिनाज धालीवाल ने बताया कि दोनों ने एक-दूसरे से लगातार संघर्ष जारी रखने की बात कही। उनके अनुसार, तीसरे दौर के बाद ही परिणाम के बारे में सोचने का फैसला किया गया था। भारतीय जोड़ी ने इसी रणनीति पर अमल किया और शुरुआती झटके के बाद मुकाबले में वापसी की।
अनंतजीत नरूका ने भी कहा कि मिश्रित टीम स्पर्धा में एक-दूसरे का समर्थन करना बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों निशानेबाज लगातार एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहे और हर निशाने के साथ अपना ध्यान बनाए रखा। कोच फिलिपेली रिकार्डो का संदेश भी स्पष्ट था—आगे बढ़ते रहो और मुकाबला जारी रखो।
कांस्य पदक अनंतजीत नरूका के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले वह विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत कांस्य पदक जीत चुके हैं और ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहे थे। नरूका ने कहा कि एशियाई खेलों का यह पदक उनके लिए खास है, क्योंकि इस बार उन्होंने पोडियम पर जगह बनाई और संघर्ष के बाद पदक हासिल किया।
इस पदक के साथ भारतीय स्कीट टीम के लिए एशियाई खेलों के ये दिन यादगार रहे। नरूका और परिनाज दोनों के खाते में इन खेलों में दो-दो पदक हो गए हैं। नरूका इससे पहले पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे, जबकि परिनाज भी महिला टीम स्पर्धा में पदक जीत चुकी हैं।
नरूका इससे पहले हांगझोउ एशियाई खेलों में व्यक्तिगत रजत और टीम कांस्य पदक जीत चुके हैं। इस बार मिश्रित टीम का कांस्य पदक उनकी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी सफलता निशानेबाजी में आने वाले युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा देगी।
परिनाज धालीवाल के लिए भी यह पदक विशेष महत्व रखता है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने विदेश जाकर आगे की पढ़ाई करने या निशानेबाजी को करियर बनाने का विकल्प था। उन्होंने निशानेबाजी को चुना और इसी खेल में अपना करियर आगे बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि वह निशानेबाजी इसलिए करती हैं क्योंकि उन्हें इस खेल से बेहद लगाव है और वह इसे लेकर जुनूनी हैं।
निशानेबाजी के मैदान में परिनाज को उनके करीबी लोग ‘परी’ नाम से बुलाते हैं। यह नाम उनके दोस्तों और परिवार के बीच लोकप्रिय हुआ और बाद में रेंज पर भी उन्हें इसी नाम से बुलाया जाने लगा। उनके लिए यह नाम उनके करीबियों से जुड़े होने की पहचान भी बन गया है।
अब अनंतजीत नरूका के सामने अगली चुनौती दोहा में होने वाली विश्व चैंपियनशिप है। वहां उनके पास भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल करने का अवसर होगा। एशियाई खेलों में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने के बाद अब उनकी नजरें आगामी विश्व चैंपियनशिप पर रहेंगी। भारतीय निशानेबाजी के लिए यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मिश्रित टीम स्कीट स्पर्धा में भारत ने पहली बार एशियाई खेलों में पदक हासिल किया है।


