Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

मॉस्को में अफगानिस्तान पर बड़ी बैठक, तालिबान के साथ भारत-चीन भी शामिल; पाकिस्तान तनाव पर रूस ने दिया बड़ा बयान

मॉस्को में अफगानिस्तान के मुद्दे पर आयोजित बहुपक्षीय बैठक में तालिबान के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत, चीन, ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति, सुरक्षा, आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक ऐसे समय में हुई है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पार तनाव लगातार बना हुआ है।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी का मॉस्को में स्वागत किया। इस दौरान लावरोव ने तालिबान सरकार के कुछ कदमों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से इस्लामिक स्टेट और अन्य चरमपंथी संगठनों के खिलाफ तालिबान की कार्रवाई तथा मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के प्रयासों का उल्लेख किया।

रूस और तालिबान के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विकसित हुए हैं। अगस्त 2021 में अमेरिका और नाटो बलों की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल किया था। इसके बाद तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश की। रूस ने जुलाई 2025 में तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश बनने का कदम उठाया था।

मॉस्को की इस बैठक में भारत की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्थिति रखता रहा है। वहीं चीन, ईरान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने बैठक को और व्यापक क्षेत्रीय स्वरूप दिया।

बैठक में कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के अधिकारी भी शामिल हुए। इससे यह स्पष्ट होता है कि अफगानिस्तान का मुद्दा केवल उसके पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य एशिया और व्यापक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

बैठक के दौरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव भी चर्चा के प्रमुख मुद्दों में रहा। दोनों देशों के बीच सीमा क्षेत्र में कई महीनों से संघर्ष और तनाव की स्थिति बनी हुई है। सीमा सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अफगानिस्तान मामलों के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने कहा कि मॉस्को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में मदद करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्ष इसके लिए अनुरोध करते हैं, तो रूस अकेले या दूसरे साझेदार देशों के साथ मिलकर मध्यस्थता की कोशिश कर सकता है।

रूस का यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष आगे बढ़ता है, तो इसका असर सीमा सुरक्षा, व्यापार, आतंकवाद और पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।

वहीं तालिबान सरकार के सामने अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता की चुनौती अभी भी बनी हुई है। रूस द्वारा मान्यता दिए जाने के बावजूद कई देश तालिबान की नीतियों को लेकर चिंतित हैं। खासतौर पर महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण तालिबान सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करती रही है।

मॉस्को बैठक से यह संकेत जरूर मिलता है कि अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद जारी है। रूस तालिबान के साथ अपने संपर्क को बढ़ा रहा है, जबकि भारत, चीन, ईरान और पाकिस्तान जैसे देश भी अफगानिस्तान से जुड़े सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर अपनी भागीदारी बनाए हुए हैं।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या रूस अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में वास्तव में कोई भूमिका निभा पाएगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि तालिबान के साथ क्षेत्रीय देशों का संवाद आगे किस दिशा में जाता है और क्या इससे अफगानिस्तान में स्थिरता लाने के प्रयासों को कोई नई गति मिलती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles