भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और नकारात्मक विचार कई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। घर, परिवार, नौकरी और निजी जिम्मेदारियों के बीच लगातार दबाव महसूस होने से मानसिक थकान बढ़ सकती है। ऐसे में अपनी भावनाओं को दबाने या उनसे लगातार लड़ने के बजाय उन्हें समझना और स्वीकार करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए मददगार हो सकता है। इसी सोच पर आधारित है Acceptance and Commitment Therapy यानी ACT।
ACT एक तरह की मनोचिकित्सा है, जिसका उद्देश्य हर नकारात्मक विचार को खत्म करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को उन विचारों और भावनाओं के साथ बेहतर तरीके से रहना सिखाना है। इसमें व्यक्ति अपनी मुश्किल भावनाओं को स्वीकार करते हुए यह सीखता है कि वह अपने जीवन के मूल्यों और प्राथमिकताओं के अनुसार किस तरह सकारात्मक कदम उठा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी ऑफिस मीटिंग से पहले मन में यह विचार आता है कि, “मैं बहुत घबरा रही हूं और सब खराब हो जाएगा”, तो ACT में इस विचार को जबरदस्ती हटाने के बजाय उसे पहचानना और स्वीकार करना सिखाया जाता है। व्यक्ति यह सोच सकता है कि घबराहट होना सामान्य है और तैयारी करके वह अपना प्रदर्शन बेहतर कर सकता है।
ACT मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर काम करती है। पहला है Acceptance यानी स्वीकार करना। इसका मतलब है कि मुश्किल परिस्थितियों में डर, उदासी, गुस्सा या चिंता जैसी भावनाएं आना स्वाभाविक हो सकता है और उन्हें लेकर खुद को दोषी ठहराने की जरूरत नहीं है। दूसरा है Commitment यानी प्रतिबद्धता। इसमें व्यक्ति अपने मूल्यों और प्राथमिकताओं को पहचानकर उनके अनुरूप जीवन में सकारात्मक बदलाव करने के लिए कदम उठाता है।
ACT के छह प्रमुख स्टेप्स बताए जाते हैं। पहला है Acceptance, यानी अपनी भावनाओं को बिना खुद को कोसे स्वीकार करना। दूसरा है Cognitive Defusion, जिसमें व्यक्ति यह समझना सीखता है कि उसके विचार केवल मन में आने वाले विचार हैं, जरूरी नहीं कि वे अंतिम सच हों। इससे नकारात्मक सोच से थोड़ी दूरी बनाने में मदद मिल सकती है।
तीसरा स्टेप है Being Present, यानी वर्तमान क्षण पर ध्यान देना। अक्सर चिंता भविष्य में होने वाली संभावित घटनाओं को लेकर होती है। ACT व्यक्ति को वर्तमान में मौजूद अनुभवों पर ध्यान केंद्रित करना सिखाती है। चौथा स्टेप है Self-as-Context। इसमें व्यक्ति यह समझने की कोशिश करता है कि उसकी पूरी पहचान उसके विचारों, भावनाओं या मुश्किल अनुभवों तक सीमित नहीं है।
पांचवां स्टेप है Values, यानी यह पहचानना कि जीवन में वास्तव में उसके लिए क्या महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए परिवार, करियर, रिश्ते, आत्मनिर्भरता या व्यक्तिगत विकास जैसे मूल्य किसी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। छठा और अंतिम स्टेप है Committed Action। इसमें व्यक्ति अपने मूल्यों के अनुरूप छोटे-छोटे व्यावहारिक कदम उठाता है और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता है।
ACT का इस्तेमाल तनाव और चिंता, डिप्रेशन, कुछ मामलों में OCD और ईटिंग डिसऑर्डर, पुराने आघात से जुड़ी परेशानियों तथा गंभीर या पुरानी बीमारी के कारण होने वाले मानसिक तनाव से निपटने में किया जा सकता है। इस थेरेपी से व्यक्ति को अपनी भावनाओं और विचारों को बेहतर ढंग से समझने, मानसिक स्पष्टता बढ़ाने और मुश्किल परिस्थितियों में अधिक प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ACT हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती और इसके परिणाम व्यक्ति की स्थिति तथा समस्या के प्रकार पर निर्भर कर सकते हैं। अगर तनाव, चिंता या उदासी लंबे समय से बनी हुई है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या प्रशिक्षित थेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। थेरेपी के साथ जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अन्य उपचार भी सुझा सकते हैं। मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर मदद लेना बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

