आज के समय में बालों का झड़ना एक आम समस्या बन चुकी है। बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, खान-पान, हार्मोनल बदलाव और कई अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोग हेयर फॉल की समस्या से परेशान रहते हैं। खासतौर पर महिलाओं में बालों के पतले होने और ज्यादा झड़ने की शिकायत देखने को मिलती है। ऐसे में लोग बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए महंगे हेयर प्रोडक्ट्स से लेकर घरेलू और प्राकृतिक उपायों तक कई तरीके आजमाते हैं। इन्हीं में इन दिनों रोजमेरी ऑयल काफी चर्चा में है।
सोशल मीडिया पर रोजमेरी ऑयल को बालों की ग्रोथ के लिए एक प्राकृतिक विकल्प के तौर पर बताया जा रहा है। कई जगह यह दावा भी किया जाता है कि रोजमेरी ऑयल बालों की ग्रोथ के मामले में मिनॉक्सिडिल जैसी दवा जितना असरदार हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई एक प्राकृतिक तेल मेडिकल ट्रीटमेंट की बराबरी कर सकता है? इस दावे को समझने के लिए रिसर्च और उपलब्ध क्लिनिकल स्टडी को देखना जरूरी है।
साल 2015 में प्रकाशित एक क्लिनिकल स्टडी में बाल झड़ने की समस्या से परेशान लोगों पर रोजमेरी ऑयल और 2 प्रतिशत मिनॉक्सिडिल की तुलना की गई थी। अध्ययन में प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में रखा गया और करीब छह महीने तक दोनों उपचारों का इस्तेमाल किया गया। छह महीने के बाद दोनों समूहों में बालों की संख्या और डेंसिटी में सुधार देखा गया। इसी रिसर्च के आधार पर रोजमेरी ऑयल को लेकर लोगों में काफी रुचि बढ़ी।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रोजमेरी ऑयल हर व्यक्ति में मिनॉक्सिडिल के बराबर ही परिणाम देगा। रिसर्च सीमित थी और इसे बड़े स्तर पर दोहराए गए अध्ययनों की जरूरत है। मिनॉक्सिडिल बाल झड़ने के कुछ प्रकारों, खासकर एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया, के लिए लंबे समय से इस्तेमाल की जाने वाली दवा है और इसके प्रभावों पर रोजमेरी ऑयल की तुलना में कहीं अधिक वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं।
रोजमेरी ऑयल के बारे में माना जाता है कि इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक कंपाउंड्स स्कैल्प के वातावरण को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं। रोजमेरी में पाए जाने वाले कार्नोसिक एसिड और अन्य एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड्स को लेकर शोध में संभावित फायदे सामने आए हैं। इससे स्कैल्प में रक्त संचार और त्वचा के स्वास्थ्य को सपोर्ट मिलने की बात कही जाती है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि रोजमेरी ऑयल निश्चित रूप से नए बाल उगा देगा।
मिनॉक्सिडिल के मामले में भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं। इसे इस्तेमाल करने के शुरुआती दौर में कुछ लोगों को स्कैल्प में जलन, खुजली या सूखापन जैसी परेशानी हो सकती है। वहीं, इसे बंद करने पर उपचार से बनाए गए बालों का फायदा समय के साथ कम हो सकता है। दूसरी तरफ, रोजमेरी एसेंशियल ऑयल भी सीधे स्कैल्प पर लगाने से जलन या एलर्जी पैदा कर सकता है। इसलिए इसे हमेशा किसी कैरियर ऑयल में मिलाकर इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
अगर घर पर रोजमेरी ऑयल इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो रोजमेरी एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदों को नारियल या जोजोबा जैसे कैरियर ऑयल में मिलाया जा सकता है। इसके बाद हल्के हाथों से स्कैल्प की मसाज करें और कुछ समय बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें। पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर है, ताकि एलर्जी या जलन की संभावना का पता चल सके।
सबसे जरूरी बात यह है कि लगातार या अचानक बढ़ रहे हेयर फॉल को केवल तेल की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आयरन की कमी, थायरॉयड, हार्मोनल बदलाव, पोषण की कमी, तनाव या किसी अन्य बीमारी की वजह से भी बाल झड़ सकते हैं। इसलिए अगर बाल तेजी से झड़ रहे हैं, स्कैल्प पर खाली पैच बन रहे हैं या समस्या लंबे समय से बनी हुई है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। रोजमेरी ऑयल कुछ लोगों के लिए सहायक हो सकता है, लेकिन इसे मिनॉक्सिडिल का निश्चित विकल्प मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।


