नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के सांसदों का मार्च मंगलवार को उस समय चर्चा में आ गया, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्वाचन सदन की ओर बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का आकाशवाणी भवन पहुंचना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इस जगह का भारत के राजनीतिक इतिहास में खास महत्व रहा है। 1975 में देश में आपातकाल लागू किए जाने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आकाशवाणी के जरिए देश को इसकी जानकारी दी थी। उस दौर में प्रेस पर सेंसरशिप लागू थी और दिल्ली के कई अखबारों के दफ्तरों की बिजली काटे जाने की बात भी सामने आई थी।
अब करीब 51 साल बाद उसी आकाशवाणी भवन परिसर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का धरने पर बैठना राजनीतिक तौर पर एक प्रतीकात्मक तस्वीर बन गया है। हालांकि, उनके वहां पहुंचने का तत्काल कारण पुलिस द्वारा निर्वाचन सदन की ओर मार्च को रोका जाना बताया जा रहा है। इसे 1975 की घटना की पुनरावृत्ति मानना एक राजनीतिक व्याख्या होगी।
INDIA गठबंधन के सांसद निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्षी नेताओं की मांग चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने की है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में भी लिया।
इस पूरे विवाद का संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और Form-6 से जुड़े सवालों से भी है। Form-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए किया जाता है। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में नियमों के खिलाफ बदलाव किए गए हैं।
वहीं निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। आयोग का कहना है कि मूल Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया और SIR के दौरान अतिरिक्त घोषणा-पत्र का इस्तेमाल किया गया। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक और कानूनी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। अदालत ने Form-6 से जुड़े मामले में केंद्र और निर्वाचन आयोग से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने Form-6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी थी और वह इस मामले में रिकॉर्ड देखकर आगे की स्थिति पर विचार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। राहुल गांधी ने अदालत की टिप्पणी को अपने आरोपों के समर्थन के तौर पर पेश किया, जबकि निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रक्रिया को लेकर अलग स्थिति स्पष्ट की है। बीजेपी की ओर से भी राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं।
आकाशवाणी भवन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का धरना इसी व्यापक राजनीतिक टकराव के बीच हुआ है। एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ आयोग अपने फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर सफाई दे रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में आकाशवाणी भवन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ने मंगलवार की तस्वीर को और चर्चा में ला दिया है। 1975 में इसी माध्यम से देश को आपातकाल की जानकारी दी गई थी और आज उसी परिसर में विपक्षी नेता चुनावी प्रक्रिया को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। दोनों घटनाओं के राजनीतिक और संवैधानिक संदर्भ अलग हैं, लेकिन एक ही स्थान से जुड़ी इन दो घटनाओं ने इतिहास और वर्तमान राजनीति के बीच एक दिलचस्प समानता जरूर पैदा कर दी है।


