नवरात्रि का व्रत हो और थाली में कुट्टू की पूरी या पकौड़ी न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस कुट्टू के आटे को व्रत के दौरान सेहतमंद माना जाता है, उसी से बनी तली-भुनी चीजें आपकी पाचन क्रिया को बिगाड़ सकती हैं? नौ दिनों तक लगातार इनका सेवन करने से एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल है कि नवरात्रि के व्रत में कुट्टू का आटा कितनी मात्रा में खाना चाहिए और इसे खाने का सही तरीका क्या है?
कुट्टू का आटा प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी खनिजों का अच्छा स्रोत है। इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह ग्लूटेन-मुक्त भी होता है, इसलिए कुछ लोग इसे गेहूं के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं। फाइबर के कारण पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है और संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर यह पाचन स्वास्थ्य में भी मदद कर सकता है।
लेकिन परेशानी तब बढ़ती है, जब कुट्टू के आटे से बनी पूरी और पकौड़ियों को रोजाना अधिक मात्रा में खाया जाता है। इन्हें गहरे तेल में तलने के कारण इनमें वसा और कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। ज्यादा तला-भुना भोजन खाने से कुछ लोगों को एसिडिटी, पेट में भारीपन, गैस, अपच और सुस्ती महसूस हो सकती है। यानी कुट्टू का आटा अपने आप में समस्या नहीं है, बल्कि इसे बनाने का तरीका और खाने की मात्रा भी मायने रखती है।
नवरात्रि के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए कुट्टू की तली हुई चीजों को रोज खाने से बचें। इनके बजाय कुट्टू के आटे की रोटी या कम तेल में तैयार दूसरे व्यंजनों को प्राथमिकता दे सकते हैं। साथ में फल, दही, छाछ, मेवे और व्रत में खाई जाने वाली सब्जियों को भी अपनी थाली में शामिल करें। इससे भोजन में विविधता बनी रहेगी और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिल सकेंगे।
अगर पूरी या पकौड़ी खाने का मन है, तो मात्रा सीमित रखें। एक बार में एक-दो छोटी पूरियां या चार-पांच छोटी पकौड़ियां कुछ लोगों के लिए उचित मात्रा हो सकती हैं, लेकिन यह हर व्यक्ति की जरूरत, स्वास्थ्य और बाकी भोजन पर निर्भर करता है। इसे रोज खाने के बजाय कभी-कभार खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। साथ ही पर्याप्त पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
जिन लोगों को मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारी या पाचन से जुड़ी परेशानी है, उन्हें व्रत के दौरान भोजन का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए नमक, तेल, कार्बोहाइड्रेट और अन्य पोषक तत्वों की सही मात्रा व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार तय होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह लें।
याद रखिए, नवरात्रि में उपवास का मतलब केवल भोजन छोड़ना नहीं, बल्कि शरीर की जरूरतों का ध्यान रखना भी है। इसलिए स्वाद के चक्कर में लगातार तली-भुनी चीजें खाने से बचें और संतुलित, पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें। आपकी छोटी-सी सावधानी त्योहार के दौरान सेहत बनाए रखने में मदद कर सकती है।

