सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबसे ऊंचे हाथियों में शामिल रमन की देखभाल और उसकी कस्टडी को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने रमन को अपने कब्जे में लेने से जुड़े पहले के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई और उसकी ताजा मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि हाथी की सेहत की नियमित निगरानी की जा रही है या नहीं। अब इस मामले में केरल सरकार को हाथी की स्थिति और उसकी देखभाल से जुड़ी जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने राज्य सरकार से रमन की कस्टडी और देखभाल से जुड़े निर्देशों के पालन पर सवाल किए। अदालत ने कहा कि हाथी की भलाई को लेकर पहले दिए गए निर्देशों का निष्ठापूर्वक पालन किया जाना चाहिए। मामले में अदालत की चिंता केवल हाथी की कस्टडी तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसकी सेहत और उसके साथ किए जा रहे व्यवहार पर भी केंद्रित रही।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि रमन अपने देखभाल करने वाले के साथ ही रहा, क्योंकि वह उस समय ‘मस्त’ अवस्था में था। हाथियों में मस्त एक प्राकृतिक जैविक स्थिति होती है, जिसके दौरान नर हाथियों में हार्मोन के स्तर में बदलाव आता है और उनका व्यवहार अधिक आक्रामक या अप्रत्याशित हो सकता है। ऐसी परिस्थिति में हाथी को स्थानांतरित करना जोखिम भरा हो सकता है और इसके लिए विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी होती है। हालांकि, इस मामले में रमन की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति का आकलन उसकी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी जानना चाहा कि अधिकारी हाथी के स्वास्थ्य पर किस तरह नजर रख रहे हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि रमन की हालिया मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश की जाए, ताकि उसकी शारीरिक स्थिति और देखभाल के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके। इस रिपोर्ट से अदालत को यह समझने में मदद मिल सकती है कि हाथी को किस तरह की चिकित्सकीय निगरानी और देखभाल की आवश्यकता है।
मामले में हाथी के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। अदालत का रुख इस बात को लेकर महत्वपूर्ण है कि किसी हाथी की देखभाल करते समय उसकी सेहत, सुरक्षा और प्राकृतिक जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हाथियों का इस्तेमाल धार्मिक आयोजनों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और दूसरे व्यावसायिक कार्यों में किया जाता रहा है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े नियमों का पालन करना आवश्यक है।
रमन की कस्टडी को लेकर पहले दिए गए निर्देशों का पालन हुआ या नहीं, यह भी सुनवाई का अहम विषय रहा। अदालत ने केरल सरकार को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि वह हाथी की भलाई और पुनर्वास से जुड़े आदेशों का पालन करे। साथ ही, उसकी वर्तमान स्थिति से संबंधित चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध कराए, ताकि आगे की कार्रवाई तथ्यों के आधार पर की जा सके।
अब इस मामले में सबकी नजरें रमन की मेडिकल रिपोर्ट और केरल सरकार के जवाब पर टिकी हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद हाथी की सेहत, उसकी देखभाल और आगे की व्यवस्था को लेकर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हाथी के कल्याण से जुड़े मामलों में निर्धारित आदेशों और नियमों का पालन हो।


