भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई और डेटा सेंटर के कारोबार को नई गति देने की तैयारी हो रही है। अडानी समूह ने अमेरिकी इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनी जेबिल इंक के साथ मिलकर एक नई साझेदारी का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत दोनों कंपनियां भारत में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े आधुनिक उपकरणों का निर्माण करेंगी। प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम में दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी 50-50 प्रतिशत होगी। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में बढ़ती तकनीकी जरूरतों को पूरा करना और भविष्य में इन उपकरणों का दूसरे देशों में निर्यात करना है। लेकिन इस समझौते से भारत के विनिर्माण क्षेत्र और एआई उद्योग को क्या फायदा हो सकता है? आइए समझते हैं पूरी खबर।
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और जेबिल इंक ने भारत में एआई और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण के लिए शुरुआती समझौता किया है। इस प्रस्ताव के तहत दोनों कंपनियां मिलकर ऐसे उपकरणों का निर्माण और असेंबलिंग करेंगी, जिनका इस्तेमाल बड़े डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्यों में किया जाता है। हालांकि, यह समझौता अभी शुरुआती चरण में है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अंतिम समझौतों पर हस्ताक्षर करने, जरूरी मंजूरियां हासिल करने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने की आवश्यकता होगी।
इस प्रस्तावित साझेदारी के तहत सर्वर, एआई रैक, स्टोरेज और नेटवर्किंग उपकरण बनाए जाने की योजना है। आज के डिजिटल दौर में इन उपकरणों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े बड़े मॉडल तैयार करने, भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करने और ऑनलाइन सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए आधुनिक कंप्यूटिंग उपकरणों की जरूरत होती है। ऐसे में भारत में इन उपकरणों का निर्माण होने से घरेलू उद्योग को नई संभावनाएं मिल सकती हैं।
इस साझेदारी की पृष्ठभूमि में जून 2026 में दोनों कंपनियों की ओर से भारत में एआई और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण के लिए रणनीतिक सहयोग विकसित करने की मंशा जताई गई थी। अब नए समझौते के माध्यम से उस योजना को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि सभी जरूरी मंजूरियां मिल जाती हैं और परियोजना लागू होती है, तो भारत में एआई से जुड़े हार्डवेयर के निर्माण की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के लिए केवल सॉफ्टवेयर और तकनीकी विचार पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए ऊर्जा, बड़े डेटा सेंटर, आधुनिक कंप्यूटिंग और उन्नत विनिर्माण को एक साथ जोड़ने वाली व्यवस्था जरूरी है। उनके अनुसार, अडानी समूह अब एआई से जुड़े बुनियादी ढांचे के साथ-साथ उन उपकरणों के निर्माण में भी अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है, जिनकी मदद से अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग व्यवस्था तैयार होगी।
वहीं, जेबिल इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक दस्तूर ने इस साझेदारी को भारत में बड़े स्तर पर एआई उपकरणों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कंपनी के इंजीनियरिंग और विनिर्माण अनुभव को अडानी समूह की ऊर्जा तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी क्षमताओं के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता एक साथ आने से आधुनिक डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण और आपूर्ति के लिए नई व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है।
अब यह समझना भी जरूरी है कि इस परियोजना में बनाए जाने वाले उपकरण आखिर काम कैसे करते हैं। सर्वर ऐसे कंप्यूटर होते हैं, जो बड़ी मात्रा में जानकारी को संसाधित करते हैं और डिजिटल सेवाएं चलाते हैं। स्टोरेज उपकरण डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं, जबकि नेटवर्किंग उपकरण विभिन्न कंप्यूटर प्रणालियों और सर्वरों को आपस में जोड़ते हैं। दूसरी ओर, एआई रैक में उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग उपकरण व्यवस्थित रूप से लगाए जाते हैं, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े जटिल कार्य तेजी से किए जा सकें।
कंपनियों का अनुमान है कि एआई कंप्यूटिंग में बढ़ते निवेश के कारण अगले सात वर्षों में इस क्षेत्र में वैश्विक बाजार का अवसर तीन ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है। यह अनुमान भविष्य में एआई से जुड़े उपकरणों और डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे की संभावित मांग को दर्शाता है। हालांकि, वास्तविक बाजार का आकार निवेश, तकनीकी विकास और वैश्विक मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
यह प्रस्ताव अडानी समूह की उस योजना से भी जुड़ा है, जिसके तहत समूह ने वर्ष 2035 तक हरित ऊर्जा से संचालित पांच गीगावाट क्षमता वाले एआई के लिए तैयार बड़े डेटा सेंटर विकसित करने के उद्देश्य से 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम से समूह को डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे के साथ उपकरण निर्माण के क्षेत्र में भी विस्तार करने का अवसर मिल सकता है।
कुल मिलाकर, अडानी एंटरप्राइजेज और जेबिल इंक की प्रस्तावित 50:50 साझेदारी भारत में एआई और डेटा सेंटर उपकरणों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कारोबारी पहल है। यदि परियोजना को जरूरी मंजूरियां मिलती हैं और यह योजना जमीन पर उतरती है, तो इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और निर्यात के नए अवसर तैयार करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम के आगे बढ़ने के लिए अंतिम समझौतों और आवश्यक मंजूरियों का इंतजार है।


