बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश लोगों को अक्सर परेशान करती है। ऐसे में कई लोग मुलेठी का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इसे चबाने से गले को आराम मिल सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मुलेठी को आप खांसी और गले की परेशानी से राहत पाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसका जरूरत से ज्यादा सेवन आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है? अधिक मात्रा में मुलेठी खाने से हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में पोटेशियम की कमी और दिल की धड़कन अनियमित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर उन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है, जिन्हें पहले से हृदय या रक्तचाप से जुड़ी परेशानी है।
मुलेठी एक जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से किया जाता रहा है। इसमें ग्लाइसीराइजिन नामक पदार्थ पाया जाता है। यही पदार्थ अधिक मात्रा में या लंबे समय तक सेवन करने पर शरीर में नमक और पानी के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण शरीर में सोडियम और पानी जमा होने लगता है, जबकि पोटेशियम का स्तर कम हो सकता है। इस स्थिति में रक्तचाप बढ़ने और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। इसलिए मुलेठी को प्राकृतिक चीज समझकर बिना किसी सावधानी के लगातार खाते रहना सही नहीं है।
मुलेठी के अधिक सेवन का पहला बड़ा नुकसान हाई ब्लड प्रेशर बढ़ना है। दरअसल, मुलेठी में मौजूद ग्लाइसीराइजिन शरीर में ऐसे बदलाव कर सकता है, जिनसे सोडियम और पानी का जमाव बढ़ जाता है। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है। जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए यह स्थिति अधिक जोखिम भरी हो सकती है। इसके अलावा, शरीर में पानी जमा होने से सूजन की परेशानी भी हो सकती है। इसलिए यदि आप रक्तचाप की दवा लेते हैं, तो नियमित रूप से मुलेठी का सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
दूसरा नुकसान शरीर में पोटेशियम की कमी होना है। पोटेशियम एक महत्वपूर्ण खनिज है, जो मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। अधिक मात्रा में मुलेठी का सेवन करने से शरीर में पोटेशियम का स्तर गिर सकता है। इसके कारण थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और कभी-कभी गंभीर शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि पोटेशियम की कमी बहुत ज्यादा हो जाए, तो दिल की सामान्य कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है।
तीसरा गंभीर नुकसान दिल की धड़कन अनियमित होना है। जब शरीर में पोटेशियम की मात्रा कम हो जाती है और रक्तचाप बढ़ता है, तो हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कुछ मामलों में दिल की धड़कन सामान्य से तेज, धीमी या अनियमित हो सकती है। गंभीर स्थिति में जानलेवा हृदय संबंधी जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में ऐसा होना जरूरी नहीं है, लेकिन अधिक मात्रा में मुलेठी खाने के संभावित जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि मुलेठी का सेवन करने के बाद सीने में दर्द, बेहोशी या तेज धड़कन जैसी परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
चौथा नुकसान गर्भावस्था के दौरान सामने आ सकता है। गर्भवती महिलाओं को मुलेठी के अधिक सेवन से बचना चाहिए। इसमें मौजूद ग्लाइसीराइजिन को लेकर गर्भावस्था में संभावित जोखिमों की चिंता जताई गई है। कुछ शोधों में गर्भावस्था के दौरान अधिक मुलेठी के सेवन को बच्चे के विकास पर प्रतिकूल प्रभावों से जोड़ा गया है। इसलिए गर्भावस्था में मुलेठी या इससे बने औषधीय उत्पादों का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। केवल प्राकृतिक होने के कारण किसी जड़ी-बूटी को गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
पांचवां नुकसान शरीर के हार्मोन संबंधी संतुलन पर प्रभाव पड़ना है। मुलेठी में मौजूद ग्लाइसीराइजिन शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन के प्रभाव को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण शरीर में सोडियम और पोटेशियम का संतुलन बिगड़ सकता है। कुछ लोगों में इसके साथ सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और सूजन जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, मासिक धर्म में गड़बड़ी को सीधे मुलेठी से जोड़ने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं, इसलिए ऐसी परेशानी होने पर चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।
अब सवाल उठता है कि मुलेठी गले की खराश में राहत कैसे दे सकती है? मुलेठी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जिनमें सूजन कम करने वाले गुण हो सकते हैं। इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से खांसी और गले की परेशानी में किया जाता है। कुछ लोगों को इसका सेवन करने से गले में आराम महसूस हो सकता है। हालांकि, इससे हर तरह की खांसी या संक्रमण ठीक हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं है। यदि गले में तेज दर्द है, बुखार बना हुआ है या सांस लेने और निगलने में परेशानी हो रही है, तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
सर्दी-खांसी और गले के संक्रमण से बचने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां भी जरूरी हैं। नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं, अपनी पानी की बोतल और खाने के बर्तन दूसरों के साथ साझा न करें तथा बीमार लोगों के निकट संपर्क से बचें। खुद बीमार होने पर दूसरों में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाएं। फ्लू का टीका लगवाने के बारे में भी चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।
कुल मिलाकर, मुलेठी का सीमित और उचित इस्तेमाल कुछ लोगों को गले की परेशानी में राहत दे सकता है, लेकिन इसका अधिक या लंबे समय तक सेवन गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है। खासतौर पर हाई ब्लड प्रेशर, हृदय और गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे लोगों तथा गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। यदि आप नियमित दवाएं लेते हैं या किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो मुलेठी को औषधीय मात्रा में इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें। याद रखें, प्राकृतिक चीजें भी गलत मात्रा में लेने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं।

