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पाकिस्तान के पेशावर में बड़ा हादसा! स्कूल की छत ढहने से 33 की मौत, 40 से ज्यादा घायल; मलबे में दबे बच्चों की तलाश जारी

पाकिस्तान के पेशावर से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां एक स्कूल की छत अचानक ढहने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 33 लोगों की मौत हो गई, जिनमें मासूम बच्चे और एक महिला शिक्षिका भी शामिल हैं। वहीं, 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबे में दबे बच्चों तथा स्कूल कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर शहर की दिर कॉलोनी में हुआ। गुरुवार को स्कूल की छत अचानक ढह गई, जिससे वहां मौजूद बच्चों और कर्मचारियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते इमारत का मलबा फैल गया और कई लोग उसके नीचे दब गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, बचावकर्मी और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

पेशावर के पुलिस प्रमुख मियां सईद ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि स्कूल की छत गिरने से कई लोगों की जान गई है। इस दुर्घटना में बच्चों के साथ एक महिला शिक्षिका की भी मौत हुई है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए आसपास के इलाकों से भी राहत एवं बचाव दलों को बुलाया गया, ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

लेडी रीडिंग अस्पताल के प्रवक्ता मुहम्मद आसिम के अनुसार, घायलों के इलाज के लिए अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था की गई है। हादसे में घायल बच्चों और अन्य लोगों को अलग-अलग चिकित्सा केंद्रों में पहुंचाया गया। अस्पतालों में डॉक्टरों की टीमें घायलों का उपचार करने में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में घायल होने वालों की संख्या 40 से अधिक है, जबकि 25 घायल बच्चों को इलाज के लिए चिकित्सा केंद्रों में पहुंचाया गया।

इस हादसे का सबसे दुखद पहलू यह है कि जान गंवाने वाले बच्चे 13 साल या उससे कम उम्र के बताए गए हैं। जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे इस दर्दनाक दुर्घटना का शिकार हो गए। घटना के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। वहीं, अस्पतालों में भर्ती घायल बच्चों के परिजन उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।

दुर्घटना के बाद बचाव दलों ने मलबा हटाने का काम शुरू किया। अधिकारियों को आशंका थी कि कुछ बच्चे और स्कूल कर्मचारी अभी भी ढही हुई इमारत के नीचे फंसे हो सकते हैं। ऐसे में बचावकर्मी सावधानीपूर्वक मलबे को हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं। राहत अभियान के दौरान घायलों को सुरक्षित बाहर निकालना और उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता बनी हुई है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। बच्चों की मौत की खबर सामने आने के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्कूल की छत किन परिस्थितियों में ढही।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में स्कूलों और अन्य इमारतों के ढहने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। इससे पहले उमरकोट के पास एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की बाहरी दीवार गिरने से तीन बच्चियों की मौत हुई थी। वहीं, लाहौर के बागबानपुरा इलाके में निर्माणाधीन निजी स्कूल की छत गिरने से एक बच्चे की जान चली गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इसके अलावा, लाहौर के कहना इलाके में एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से भी कई बच्चों की मौत होने की खबर सामने आई थी।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं स्कूल भवनों की गुणवत्ता, निर्माण मानकों और सुरक्षा जांच को लेकर चिंता बढ़ाती हैं। स्कूल ऐसी जगहें हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। ऐसे में भवनों की नियमित जांच, निर्माण संबंधी नियमों का पालन और कमजोर इमारतों की समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है।

फिलहाल, पेशावर के दिर कॉलोनी में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य जारी है। पूरे मामले में जांच के बाद ही छत गिरने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां क्या पर्याप्त कदम उठा रही हैं।

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