चीन के तिब्बत में धरती के जोरदार कांपने से तबाही मच गई है। शक्तिशाली भूकंप ने कई इलाकों को हिलाकर रख दिया, मकान क्षतिग्रस्त हो गए और लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 16 लोगों की मौत और 76 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए चीन ने बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान शुरू कर दिया है। मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए उपग्रहों और मानवरहित विमानों यानी ड्रोन की मदद ली जा रही है। आखिर इस भूकंप से कितनी तबाही हुई और प्रभावित लोगों को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं? आइए जानते हैं पूरी खबर।
चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आए इस भूकंप की तीव्रता 7.0 बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, भूकंप का केंद्र नागकू शहर की बाकेन काउंटी में था। स्थानीय समय के मुताबिक, यह घटना रात करीब 10 बजकर 33 मिनट पर हुई। भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर 10 किलोमीटर से भी कम गहराई पर होने के कारण इलाके में तेज कंपन महसूस किया गया। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और बचाव दल तुरंत सक्रिय हो गए। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और घायलों को चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
भूकंप से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 12 हजार 489 लोगों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है। कई मकानों के ढहने या क्षतिग्रस्त होने से लोगों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, 330 से अधिक मकान ढह गए या उन्हें नुकसान पहुंचा है। हालांकि, नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है।
बचाव अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए चीन ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। भूकंप प्रभावित क्षेत्र में उपग्रहों और ड्रोन को तैनात किया गया है। इनकी मदद से प्रभावित इलाकों की तस्वीरें जुटाने, हालात का आकलन करने और आपातकालीन संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है। दुर्गम क्षेत्रों में राहत दलों के लिए पहुंचना मुश्किल हो सकता है, इसलिए हवाई निगरानी और उपग्रह आधारित संचार व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बचाव दल मलबे में फंसे संभावित जीवित लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
चीन की सरकार ने राहत और पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता भी आवंटित की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आपातकालीन आपदा राहत के लिए लगभग पांच करोड़ युआन की राशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा, प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए तीन करोड़ युआन की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। राहत सामग्री में एक हजार तैयार आवासीय इकाइयां, तीन हजार 239 तंबू, दो हजार 821 तह किए जा सकने वाले बिस्तर, रजाइयां, चूल्हे और कपड़े जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इन सामग्रियों को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि बेघर हुए लोगों को कठिन परिस्थितियों में सहारा मिल सके।
इस आपदा के बीच मौसम भी राहत कार्यों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। भूकंप प्रभावित क्षेत्र समुद्र तल से औसतन 4,800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में तापमान शून्य से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिरने की आशंका जताई है। इसके अलावा, भूकंप के केंद्र के आसपास की तीन बस्तियों में रुक-रुककर बर्फबारी होने का पूर्वानुमान है। ऐसे में खुले स्थानों पर रह रहे लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचाना प्रशासन के लिए बेहद जरूरी होगा।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश तेज करने, घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता देने और जनहानि को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास करने का निर्देश दिया है। उन्होंने मौसम और भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रखने तथा संभावित दूसरी आपदाओं को रोकने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने और राहत कार्यों को मजबूत बनाने का आह्वान किया है।
फिलहाल, तिब्बत में बचाव और राहत अभियान जारी है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय, भोजन, चिकित्सा सहायता और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। भूकंप से हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर आने वाले समय में और स्पष्ट होगी। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और कड़ाके की ठंड से प्रभावित परिवारों की रक्षा करना है। ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों के लिए जुड़े रहिए और इस समाचार को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए साझा करना न भूलें।


