उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाने की योजना सामने आई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में यात्रियों की आवाजाही और माल ढुलाई को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लगभग 650 गांवों और उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से होकर गुजरेंगे। इन परियोजनाओं के लिए करीब 8,200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना बनाई गई है। जमीन अधिग्रहण पर ही सरकारी खजाने से 15,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान बताया गया है। ऐसे में सवाल है कि ये तीनों एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, परिवहन और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना में विंध्य एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे और विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इन तीनों परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर बनाना और परिवहन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाना है। बेहतर सड़क नेटवर्क से लोगों को यात्रा करने में आसानी हो सकती है, वहीं उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे लंबा विंध्य एक्सप्रेसवे बताया गया है, जिसकी लंबाई लगभग 320 किलोमीटर होगी। यह परियोजना विंध्य क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, एक्सप्रेसवे का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि इसका मार्ग किन प्रमुख शहरों, बाजारों और परिवहन केंद्रों को जोड़ता है तथा निर्माण कार्य कब पूरा होता है।
दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे है, जिसकी प्रस्तावित लंबाई लगभग 145 किलोमीटर बताई गई है। इस मार्ग से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क बेहतर बनाने की योजना है। मेरठ और हरिद्वार के बीच बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक वाहनों को भी सुविधा मिल सकती है। हरिद्वार धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, इसलिए बेहतर सड़क संपर्क से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रा समय में वास्तविक कमी का आकलन विस्तृत मार्ग और यातायात व्यवस्था की जानकारी के बाद ही किया जा सकेगा।
तीसरी परियोजना विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे है, जिसकी लंबाई लगभग 100 किलोमीटर बताई गई है। इस लिंक एक्सप्रेसवे का उद्देश्य प्रदेश के क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत करना है। यदि इसे अन्य प्रमुख सड़क परियोजनाओं से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, तो इससे यात्रियों और मालवाहक वाहनों को बेहतर मार्ग विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही, संबंधित क्षेत्रों में नए व्यापारिक केंद्र और आर्थिक गतिविधियां विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
इन तीनों परियोजनाओं के लिए लगभग 8,200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना है। जमीन अधिग्रहण किसी भी बड़े सड़क प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें संबंधित भूमि की पहचान, स्वामित्व का सत्यापन, मुआवजे का निर्धारण और प्रभावित लोगों से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। सरकार के सामने चुनौती होगी कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो और किसानों तथा अन्य प्रभावित भूमि मालिकों को नियमानुसार उचित मुआवजा मिले। परियोजनाओं की समयसीमा बनाए रखने के लिए प्रशासनिक समन्वय भी जरूरी होगा।
बताया गया है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा सकते हैं। इतनी बड़ी राशि से इन परियोजनाओं के आर्थिक महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, यह राशि मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण के लिए बताई गई है। इसे तीनों एक्सप्रेसवे के निर्माण की कुल लागत नहीं समझना चाहिए। निर्माण, पुलों, अंडरपास, प्रवेश और निकास मार्गों तथा अन्य सुविधाओं पर होने वाला खर्च अलग हो सकता है।
इन परियोजनाओं को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने की व्यापक योजना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मौजूदा और प्रस्तावित एक्सप्रेसवे परियोजनाएं प्रदेश को वर्ष 2030 तक एक लाख करोड़ नहीं, बल्कि एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। बेहतर परिवहन व्यवस्था से उद्योगों को कच्चा माल पहुंचाने, तैयार उत्पादों को बाजार तक ले जाने और निवेश आकर्षित करने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक इकाइयों, गोदामों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के विकास की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
इन तीनों परियोजनाओं के विकास की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीईआईडीए को सौंपी गई है। अब परियोजनाओं की प्रगति भूमि अधिग्रहण, स्वीकृतियों, वित्तीय व्यवस्था और निर्माण की समयसीमा पर निर्भर करेगी। फिलहाल, इन प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से प्रदेश के सड़क नेटवर्क को विस्तार मिलने की उम्मीद है। यदि योजनाएं तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिल सकती है।


