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होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका का हमला! 2 ईरानी मछुआरे घायल, मुजतबा खामेनेई ने सेना को दिया जवाबी कार्रवाई का आदेश

दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का केंद्र बन गया है। यहां दो मछली पकड़ने वाली नावों पर कथित अमेरिकी ड्रोन हमले में दो ईरानी मछुआरों के घायल होने की खबर सामने आई है। इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण हालात को और गंभीर बना दिया है। एक तरफ ईरान अमेरिकी हमले का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी तरफ उसकी नौसेना ने दुश्मन की एक पनडुब्बी को नष्ट करने का दावा किया है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रमुख समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटाने की बात कही है। इन घटनाओं के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अपनी सेना को किसी भी खतरे का तत्काल और कड़ा जवाब देने का निर्देश दिया है।

सबसे पहले बात करते हैं केशम द्वीप के पास हुई उस घटना की, जिसने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में केशम द्वीप के पास दो मछली पकड़ने वाली नावों को अमेरिकी ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। इस घटना में दो ईरानी मछुआरे घायल हो गए। केशम फिशिंग कम्युनिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मुताबिक, हमले के बाद लापता हुए दोनों मछुआरों को खोज लिया गया और उन्हें सुरक्षित वापस केशम द्वीप पहुंचाया गया। घायलों में से एक को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

होर्मुजगन प्रांत के उप-गवर्नर ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर हुई थी। हमले में मुसान गांव के पास मौजूद दो मछली पकड़ने वाली नावें शामिल थीं। प्रत्येक नाव पर दो-दो लोग सवार थे। ईरानी अधिकारियों ने इस कार्रवाई के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इस कथित हमले पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वहीं, इस घटनाक्रम से पहले शुक्रवार सुबह ईरानी नौसेना ने एक बड़ा दावा किया था। ईरानी सरकारी प्रसारण संस्था आईआरआईबी के अनुसार, ईरानी नौसैनिक बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में एक दुश्मन की पनडुब्बी को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। इसके अलावा दो व्यावसायिक तेल टैंकरों को भी नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया। ईरानी नौसेना के जनसंपर्क विभाग के हवाले से बताया गया कि यह कार्रवाई उस समुद्री क्षेत्र में की गई, जिसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, पनडुब्बी के नष्ट होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

दूसरी तरफ अमेरिकी सेना भी होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आवागमन रास्तों से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने की कार्रवाई की गई है। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। इस क्षेत्र में अमेरिकी सेना की तैनाती और निगरानी गतिविधियां भी बढ़ाई गई हैं।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बयान ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की ओर से आया है। उन्होंने देश के सैन्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अमेरिका या इजरायल की ओर से किसी भी तरह के खतरे का तत्काल और प्रभावी जवाब दिया जाए। उनके संदेश में जवाबी कार्रवाई के लिए भौगोलिक सीमाओं की पाबंदी नहीं रखने की बात भी कही गई है। इस निर्देश को ईरान की ओर से संभावित सैन्य टकराव के लिए तैयार रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच कूटनीतिक स्तर पर भी तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं। क्षेत्रीय देशों के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच अविश्वास और सैन्य टकराव की स्थिति बनी हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियां अमेरिका और ईरान को एक और बड़े युद्ध की ओर धकेल देंगी? यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र की गतिविधियों और अमेरिका तथा ईरान के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।

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