लोकसभा ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, वैश्विक निवेश, डिजिटल भुगतान और डेटा सेंटर के क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। नए कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण करने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट 2040-41 तक बढ़ा दी गई है, जबकि मुंबई और सूरत में कच्चे हीरों के कारोबार के लिए भी 15 वर्ष तक टैक्स राहत देने का प्रावधान किया गया है।
यह विधेयक सरकार द्वारा पहले जारी अध्यादेश का स्थान लेगा और इसके जरिए आयकर अधिनियम, वित्त अधिनियम तथा भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से भारत वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक कारोबारी गंतव्य बनेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बड़ा फायदा
सरकार ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और इनके पुर्जों के अनुबंध आधारित निर्माण (Contract Manufacturing) में लगी विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट को 10 वर्ष बढ़ाकर 2040-41 तक कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को नई गति मिलेगी और वैश्विक कंपनियां यहां अधिक निवेश करेंगी।
इसके अलावा सीमा शुल्क गोदामों में रखे इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों की आपूर्ति से होने वाली विदेशी कंपनियों की आय को भी 15 वर्षों तक कर मुक्त रखने का प्रस्ताव किया गया है। इससे भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल पेमेंट में MDR व्यवस्था का रास्ता साफ
विधेयक में डिजिटल भुगतान से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकार को अब अधिसूचना के माध्यम से यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू रहेगा।
MDR वह शुल्क होता है जो कार्ड या डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाता है। हालांकि नए विधेयक में किसी नए शुल्क का सीधा प्रावधान नहीं किया गया है, लेकिन इससे भविष्य में कुछ विशेष प्रकार के डिजिटल लेनदेन के लिए नई व्यवस्था लागू करने का कानूनी आधार तैयार हो गया है।
विदेशी निवेशकों के लिए आसान होंगे नियम
सरकार ने विदेशी कोष प्रबंधकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए भी कर नियमों को सरल बनाया है। इसका उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को भारत में निवेश और फंड मैनेजमेंट गतिविधियां संचालित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से विदेशी निवेशकों की वैश्विक आय पर भारत में अनावश्यक कर बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे भारत अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए और अधिक आकर्षक बन सकेगा।
डेटा सेंटर और AI सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा
विधेयक में विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटर के उपयोग से जुड़ी कई शर्तों को आसान किया गया है। अब डेटा सेंटर को प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय लीज या पट्टे पर संचालित करने की अनुमति भी दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे देश में बड़े AI डेटा सेंटर स्थापित होंगे और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी। इससे रोजगार और तकनीकी निवेश दोनों में वृद्धि होने की संभावना है।
मुंबई और सूरत को मिलेगा फायदा
सरकार ने मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों के कारोबार से होने वाली विदेशी कंपनियों की आय को 15 वर्षों तक कर छूट देने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य वैश्विक डायमंड ट्रेड का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित करना और दोनों शहरों को अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक कदम
कर विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों से भारत में निवेश का माहौल और मजबूत होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी फंड मैनेजमेंट कंपनियां, प्राइवेट इक्विटी फर्म और वैश्विक निवेश कोष अब अपनी गतिविधियां भारत में स्थानांतरित करने के लिए अधिक उत्साहित हो सकते हैं। इससे निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
क्या होगा असर?
सरकार का दावा है कि नए संशोधनों से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, डेटा सेंटर, डिजिटल भुगतान, विदेशी निवेश और हीरा कारोबार जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही कारोबार करना आसान होगा और भारत वैश्विक विनिर्माण तथा निवेश का एक मजबूत केंद्र बनकर उभर सकेगा।


