इजराइल की राजनीति में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक स्थिति और अमेरिका के साथ उनके रिश्तों को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब आगामी इजरायली चुनाव में नेतन्याहू के समर्थन को लेकर पहले की तरह स्पष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। लंबे समय से ट्रंप और नेतन्याहू की राजनीतिक दोस्ती को अमेरिका और इजराइल के रिश्तों का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता रहा है, लेकिन अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक नेतन्याहू जब हाल में वाशिंगटन पहुंचे थे, तब ट्रंप ने उनके साथ बंद कमरे में चुनाव को लेकर सवाल किया था। कथित तौर पर ट्रंप ने नेतन्याहू से पूछा कि क्या उन्हें भरोसा है कि वह चुनाव जीत रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सवाल पर नेतन्याहू ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और चुप रहे। इसी घटनाक्रम को दोनों नेताओं के बीच बदलते राजनीतिक समीकरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। नेतन्याहू लंबे समय से इजराइल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे हैं और उनके नेतृत्व में देश ने कई बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी फैसले देखे हैं। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनकी सरकार और नेतृत्व को लेकर देश के भीतर राजनीतिक बहस तेज है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का रुख भी इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना देता है, क्योंकि अमेरिका इजराइल का प्रमुख सहयोगी है और दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच संबंधों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ता है। रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि इजराइल में नेतन्याहू की कमजोर होती राजनीतिक स्थिति और जनता के बदलते मूड को देखते हुए ट्रंप आगामी चुनाव में उनके लिए खुलकर समर्थन देने से दूरी बना सकते हैं। हालांकि, किसी नेता के चुनावी समर्थन को लेकर अंतिम फैसला राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है और फिलहाल इसे नेतन्याहू की निश्चित विदाई के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। फिर भी ट्रंप के कथित सवाल और नेतन्याहू की चुप्पी ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है। अक्टूबर 2026 में होने वाले प्रस्तावित चुनाव को लेकर इजराइल की राजनीति में पहले से ही काफी हलचल है। ऐसे में अगर नेतन्याहू को अमेरिकी समर्थन के मोर्चे पर भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, तो चुनावी रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है। नेतन्याहू के समर्थकों के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है, जबकि उनके राजनीतिक विरोधियों को सरकार के खिलाफ अपने अभियान को मजबूत करने का मौका मिल सकता है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि चुनावी राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते हैं और किसी नेता की जीत या हार का फैसला केवल विदेशी समर्थन से नहीं होता। इजराइल की जनता के मुद्दे, सुरक्षा की स्थिति, अर्थव्यवस्था, सरकार के फैसले और राजनीतिक गठबंधनों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल ट्रंप और नेतन्याहू के बीच कथित बातचीत ने इस सवाल को जरूर जन्म दे दिया है कि क्या अमेरिका की राजनीति में नेतन्याहू को लेकर पहले जैसा भरोसा कायम है या आने वाले चुनाव से पहले वाशिंगटन अपना रुख बदल सकता है। यही वजह है कि इजराइल के प्रस्तावित चुनाव से पहले नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले महीनों में सामने आने वाले सर्वेक्षण, गठबंधन की तस्वीर और ट्रंप प्रशासन के बयानों से यह स्पष्ट हो सकता है कि नेतन्याहू के लिए चुनावी मैदान कितना मुश्किल होने वाला है।
नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट! ट्रंप के बदले तेवर से इजराइल की सियासत में बढ़ी हलचल


