भारतीय रुपये पर दबाव मंगलवार को भी जारी रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच रुपये में कमजोरी देखने को मिली। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 13 पैसे कमजोर होकर 95.74 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को रुपया 19 पैसे टूटकर 95.61 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस तरह लगातार दूसरे कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा में कमजोरी देखने को मिली।
रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजहों में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.68 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान भारतीय मुद्रा 95.64 से लेकर 95.75 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में रही। आखिरकार कारोबार खत्म होने पर रुपया 95.74 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले बंद भाव की तुलना में यह 13 पैसे की गिरावट है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते में देरी और पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इन परिस्थितियों का सीधा असर उन देशों की मुद्राओं पर पड़ सकता है जो तेल का बड़े पैमाने पर आयात करते हैं।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचना भारत के लिए भी चिंता का विषय है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर रुपये के साथ-साथ महंगाई और चालू खाते के संतुलन पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता भी तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है। यहां किसी तरह का व्यवधान पैदा होने की आशंका भी कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर ले जा सकती है।
रुपये की चाल पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर पड़ रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ सकती है। हालिया कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया था। हालांकि मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने करीब 1,651 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी रुपये के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल ऊंचा रहने से निवेशकों के लिए डॉलर आधारित परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल सकता है।
डॉलर की वैश्विक मजबूती भी रुपये की दिशा को प्रभावित करती है। हालांकि मंगलवार को छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स मामूली रूप से कमजोर होकर 99.60 के आसपास रहा। इसके बावजूद डॉलर की कुल मांग और अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर बाजार की नजर बनी हुई है।
घरेलू शेयर बाजार में भी मंगलवार को गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 492.70 अंक टूटकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 132.75 अंक की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया के तनाव का असर घरेलू बाजार की धारणा पर भी पड़ा।
हालांकि रुपये के लिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी आधार, विदेशी मुद्रा भंडार और रिजर्व बैंक की नीतिगत भूमिका से अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। अगर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है, तो रुपये को राहत मिल सकती है।
दूसरी तरफ अगर तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो रुपये पर दबाव आगे भी बना रह सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
कुल मिलाकर भारतीय रुपये के लिए फिलहाल वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया का तनाव, महंगा कच्चा तेल और डॉलर की मांग रुपये पर दबाव डाल रहे हैं। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार और नीतिगत समर्थन से मध्यम अवधि में स्थिति संभलने की उम्मीद बनी हुई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपया 95 रुपये के स्तर के आसपास किस तरह कारोबार करता है और वैश्विक घटनाक्रम भारतीय मुद्रा को किस दिशा में ले जाता है।


