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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सिंगापुर में नए चांसरी कॉम्प्लेक्स की रखी आधारशिला, बोले- रिश्तों के नए युग का बनेगा प्रतीक

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के नए चांसरी कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी। इस मौके पर सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन भी मौजूद रहे। जयशंकर ने उम्मीद जताई कि नया उच्चायोग परिसर भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के एक नए दौर का प्रतीक बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि नए परिसर से सिंगापुर में रहने वाले भारतीय समुदाय को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

एस जयशंकर सिंगापुर की यात्रा पर चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक यानी ISMR में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। इसी दौरान जयशंकर ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ नए उच्चायोग परिसर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उन्हें नए उच्चायोग परिसर की आधारशिला रखने के अवसर पर सिंगापुर के विदेश मंत्री के साथ शामिल होने पर खुशी है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह परिसर भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए युग को प्रदर्शित करेगा। साथ ही इससे भारतीय समुदाय के लिए राजनयिक और नागरिक सेवाओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सिंगापुर में भारतीय समुदाय की मौजूदगी काफी महत्वपूर्ण है। 2020 की जनगणना के अनुसार, सिंगापुर की कुल आबादी में भारतीय मूल के लोगों की हिस्सेदारी करीब नौ प्रतिशत थी। सिंगापुर में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी रहते हैं। भारतीय समुदाय के लोग वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी, निर्माण, समुद्री क्षेत्र और शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

सिंगापुर की आधिकारिक भाषाओं में तमिल भी शामिल है। इसके अलावा अंग्रेजी, मंदारिन चीनी और मलय वहां की आधिकारिक भाषाएं हैं। ऐसे में भारत और सिंगापुर के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। नया भारतीय उच्चायोग परिसर इन संबंधों को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।

नए चांसरी कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखने से पहले जयशंकर और विवियन बालाकृष्णन के बीच भारत-सिंगापुर संबंधों को मजबूत करने को लेकर विस्तृत चर्चा भी हुई। दोनों नेताओं ने मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श किया। जयशंकर ने कहा कि वह भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक के दौरान सिंगापुर के विदेश मंत्री के साथ आगे भी बातचीत को लेकर आशान्वित हैं।

भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। इसकी पहली बैठक सितंबर 2022 में नई दिल्ली में आयोजित हुई थी। इसके बाद अगस्त 2024 में दूसरी बैठक सिंगापुर में हुई, जबकि तीसरी बैठक पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।

चौथी बैठक में एस जयशंकर के अलावा वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी हिस्सा लेंगे। बैठक में व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास और उभरती तकनीकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

भारत और सिंगापुर ने 2015 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है। व्यापार और निवेश के अलावा डिजिटलाइजेशन, रक्षा एवं सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास और नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

सिंगापुर आसियान क्षेत्र में भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। इसके साथ ही सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI का एक प्रमुख स्रोत है। विदेशी वाणिज्यिक ऋण और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के क्षेत्र में भी सिंगापुर की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सिंगापुर भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। इस अवधि में भारत ने सिंगापुर से करीब 2,120 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आयात किया, जबकि सिंगापुर को भारत का निर्यात लगभग 1,440 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा। पिछले एक दशक में सिंगापुर से भारत में होने वाला वार्षिक निवेश भी महत्वपूर्ण स्तर पर बना रहा है।

ऐसे में सिंगापुर में नए भारतीय उच्चायोग परिसर की आधारशिला सिर्फ एक नए भवन की शुरुआत नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों का प्रतीक मानी जा रही है। भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग लगातार विस्तार ले रहा है और आने वाले समय में इस साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है।

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