बलिया जिले के सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के महुलानपार गांव की 19 वर्षीय ज्योति के लिए रविवार का दिन उम्मीदों से भरा रहा। दोनों पैरों से दिव्यांग ज्योति की पढ़ाई आने-जाने की परेशानी के कारण आठवीं कक्षा के बाद छूट गई थी। लेकिन अब जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की पहल से उसके दोबारा स्कूल जाने और शिक्षक बनने के सपने को नई उम्मीद मिली है।
ज्योति की परेशानी की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह रविवार को खुद उसके घर पहुंचे। डीएम ने ज्योति और उसके परिवार से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को करीब से समझा। घर पहुंचकर जिलाधिकारी ने न सिर्फ ज्योति की बात सुनी, बल्कि उसकी पढ़ाई में आ रही सबसे बड़ी बाधा को दूर करने की दिशा में तत्काल कदम भी उठाया।
ज्योति के लिए स्कूल तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती थी। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण उसके लिए सामान्य तरीके से आवागमन करना मुश्किल था। इसी वजह से आठवीं कक्षा के बाद उसकी पढ़ाई छूट गई। पढ़ाई रुकने के बावजूद ज्योति ने अपने सपने को छोड़ा नहीं। वह आगे पढ़ना चाहती है और भविष्य में शिक्षक बनना उसका सपना है।
जिलाधिकारी ने ज्योति की स्थिति को देखते हुए उसे बैटरी चालित ट्राई साइकिल प्रदान की। यह ट्राई साइकिल उसके लिए महज एक सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा की राह में आई बड़ी बाधा को दूर करने का माध्यम बन सकती है। अब ज्योति के लिए स्कूल आने-जाने में पहले के मुकाबले काफी आसानी होने की उम्मीद है।
डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने संबंधित अधिकारियों को ज्योति का स्कूल में दाखिला कराने के निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी की इस पहल से ज्योति की पढ़ाई दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है। आठवीं के बाद पढ़ाई छूट जाने के कारण उसके भविष्य को लेकर जो चिंता थी, अब उसमें नई उम्मीद दिखाई दे रही है।
ज्योति के शिक्षक बनने के सपने को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन की ओर से उठाया गया यह कदम यह भी दिखाता है कि जरूरतमंद लोगों तक सरकारी व्यवस्था की मदद पहुंचाने के लिए अधिकारी सीधे उनके घर तक पहुंच सकते हैं। ज्योति के परिवार के लिए भी जिलाधिकारी का घर पहुंचना और उसकी समस्या को समझना राहत भरा रहा।
बैटरी चालित ट्राई साइकिल मिलने के बाद अब ज्योति के सामने सबसे बड़ा रास्ता अपनी पढ़ाई को दोबारा शुरू करना है। स्कूल में दाखिले के निर्देश के बाद उम्मीद है कि वह शिक्षा की अपनी अधूरी यात्रा को फिर से आगे बढ़ा सकेगी। जिस पढ़ाई को कभी आने-जाने की मजबूरी ने रोक दिया था, अब वही पढ़ाई एक नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ सकती है।
ज्योति की कहानी उन हजारों बच्चों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जो किसी शारीरिक चुनौती या आर्थिक और सामाजिक परेशानी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उनकी समस्या को समझा जाए और उन्हें आगे बढ़ने के लिए जरूरी सहयोग दिया जाए।
बलिया डीएम की इस पहल के बाद अब ज्योति की नजर अपने अगले कदम पर है। ट्राई साइकिल मिलने के साथ उसके लिए स्कूल तक पहुंचने की मुश्किल कुछ आसान हुई है और दाखिले के निर्देश ने उसके शिक्षक बनने के सपने को फिर से जिंदा कर दिया है। अब देखना होगा कि ज्योति किस तरह अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करती है और मेहनत के दम पर अपने सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में आगे बढ़ती है।


