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“गिरा दूंगा एटम बम!” पुतिन की खुली चेतावनी, कालिनिनग्राद पर हमला हुआ तो NATO के खिलाफ चलेगा रूस का पूरा हथिया

सोचिए, यूरोप के बीच अचानक ऐसा संकट खड़ा हो जाए, जिसमें एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन NATO हो और दूसरी तरफ परमाणु हथियारों से लैस रूस… और इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कह दें कि अगर उसके इलाके पर सीधा हमला हुआ, तो रूस अपने पास मौजूद सभी हथियारों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। इसी बयान ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान रूस और NATO के बीच बढ़ते तनाव की तरफ खींच दिया है।

मामला रूस के पश्चिमी इलाके कालिनिनग्राद से जुड़ा है। कालिनिनग्राद रूस का ऐसा क्षेत्र है, जो मुख्य रूसी भूभाग से अलग है और बाल्टिक सागर के किनारे पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है। दोनों ही NATO के सदस्य देश हैं। रणनीतिक रूप से यह इलाका रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां रूस की सैन्य मौजूदगी भी है।

रूस की तरफ से NATO को एक राजनयिक संदेश भेजे जाने की बात सामने आई, जिसमें मॉस्को ने दावा किया कि उसे ऐसी जानकारी मिली है कि NATO कालिनिनग्राद को हवाई और समुद्री रास्ते से अलग-थलग करने की तैयारी कर रहा है। रूस ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताया और चेतावनी दी कि अगर कालिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्से से काटने की कोशिश की गई, तो मॉस्को अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है।

इसके बाद पुतिन ने भी इसी मुद्दे पर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि रूस का किसी यूरोपीय देश पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन अगर रूस के खिलाफ सीधा सैन्य हमला किया जाता है तो मॉस्को जवाब देने के लिए तैयार है। इसी दौरान कालिनिनग्राद का जिक्र करते हुए उन्होंने रूस की सैन्य क्षमता और संभावित जवाब को लेकर बेहद सख्त संदेश दिया।

पुतिन के बयान में परमाणु हथियारों का जिक्र सबसे ज्यादा चर्चा में है। रूस पहले भी अपनी परमाणु क्षमता को लेकर पश्चिमी देशों को चेतावनी देता रहा है, लेकिन कालिनिनग्राद को लेकर सामने आया यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध के कारण रूस और NATO के बीच तनाव पहले से काफी ज्यादा है। मॉस्को का कहना है कि उसके इलाके को अलग-थलग करने या उस पर हमला करने की किसी भी कोशिश को वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखेगा।

वहीं NATO ने रूस की इस परमाणु बयानबाजी को खारिज किया है। NATO की तरफ से कहा गया है कि गठबंधन रक्षात्मक भूमिका में है और रूस के इलाके पर कब्जे या हमला करने की कोई योजना नहीं है। NATO ने मॉस्को की ओर से बार-बार परमाणु हथियारों का जिक्र किए जाने पर भी चिंता जताई है।

यानी इस पूरे विवाद में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कालिनिनग्राद को लेकर रूस और NATO के बीच तनाव आखिर कितना बढ़ेगा। एक तरफ मॉस्को अपने इलाके की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने की चेतावनी दे रहा है, तो दूसरी तरफ NATO रूस की परमाणु धमकियों को अस्वीकार करते हुए अपने रक्षात्मक रुख पर कायम है।

इस घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अगर कभी रूस और NATO के बीच सीधा सैन्य टकराव होता है, तो स्थिति यूक्रेन तक सीमित रहने के बजाय यूरोप के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकती है। हालांकि फिलहाल परमाणु हमला होने जा रहा है, ऐसा कोई पुष्ट संकेत सामने नहीं है। अभी जो सामने आया है, वह रूस की तरफ से दी गई कड़ी चेतावनी और NATO की ओर से उसका जवाब है।

कालिनिनग्राद की भौगोलिक स्थिति और वहां मौजूद सैन्य महत्व के कारण यह विवाद आने वाले समय में भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम बना रह सकता है। रूस की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि मॉस्को इस इलाके को लेकर किसी भी संभावित खतरे को गंभीरता से ले रहा है। अब नजर इस बात पर है कि रूस और NATO के बीच यह तनाव सिर्फ बयानबाजी तक रहता है या आने वाले समय में कोई नया घटनाक्रम सामने आता है।

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