मिर्जापुर के चर्चित लहुरियादह गांव में कक्षा आठ तक के निर्माणाधीन विद्यालय का काम एक बार फिर रुक गया है। शिक्षा विभाग की ओर से शुरू कराए गए स्कूल निर्माण पर वन विभाग ने आपत्ति जताई है। वन विभाग की टीम और डीएफओ ने मौके का निरीक्षण करने के बाद निर्माणाधीन जमीन को अपने विभाग की भूमि बताया। इसके बाद विद्यालय का निर्माण कार्य बंद करा दिया गया।
लहुरियादह गांव पहले भी शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा में रहा है। गांव में स्कूल निर्माण की मांग लंबे समय से उठती रही थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और गांव में ही कक्षा आठ तक की शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
मामला उस समय और चर्चा में आया था, जब पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने लहुरियादह को लेकर एक वीडियो जारी किया था। वीडियो में गांव की स्थिति और वहां मौजूद समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ी और विद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराकर निर्माण कार्य शुरू कराया गया।
निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ग्रामीणों में भी उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से चली आ रही स्कूल की मांग अब पूरी हो जाएगी। लेकिन निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद ही वन विभाग की आपत्ति सामने आने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि वन विभाग की टीम ने निर्माणाधीन विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जमीन के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच की। इसके बाद वन विभाग की ओर से दावा किया गया कि जिस भूमि पर स्कूल का निर्माण कराया जा रहा है, वह वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है।
वन विभाग की आपत्ति के बाद फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन पर शिक्षा विभाग ने निर्माण शुरू कराया था, उसके स्वामित्व और उपयोग को लेकर पहले पूरी तरह जांच क्यों नहीं हुई। अगर जमीन वास्तव में वन विभाग की है तो निर्माण शुरू होने से पहले संबंधित विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं किया गया, यह भी सवालों के घेरे में है।
निर्माण कार्य रुकने से लहुरियादह के ग्रामीणों में निराशा है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि स्कूल का भवन तैयार होने के बाद गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा की सुविधा मिलेगी। अब जमीन को लेकर विभागों के बीच विवाद सामने आने के बाद स्कूल का भविष्य एक बार फिर अधर में दिखाई दे रहा है।
इस पूरे मामले में अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन के वास्तविक स्वामित्व और विद्यालय निर्माण के लिए उसकी वैधता को स्पष्ट करना है। अगर जमीन को लेकर कोई तकनीकी या कानूनी अड़चन है तो उसका समाधान निकालना जरूरी होगा, ताकि बच्चों की शिक्षा से जुड़ी यह योजना लंबे समय तक अटकी न रहे।
लहुरियादह में स्कूल निर्माण का यह मामला अब सिर्फ एक भवन के निर्माण तक सीमित नहीं है। यह सरकारी विभागों के बीच समन्वय, जमीन के रिकॉर्ड की जांच और ग्रामीणों को मिलने वाली शिक्षा सुविधा से भी जुड़ा हुआ है। फिलहाल वन विभाग की आपत्ति के बाद काम बंद है और ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस विवाद का समाधान कब तक निकालता है और स्कूल निर्माण दोबारा कब शुरू होता है।


