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एशियाई पैरा खेलों के स्वर्ण पदक विजेता नीरज यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, डोपिंग विवाद के बाद छिन गए थे पदक और सरकारी नौकरी

एशियाई पैरा खेलों में भारत का नाम रोशन करने वाले पूर्व स्वर्ण पदक विजेता नीरज यादव की दिल्ली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 42 वर्षीय नीरज का शव मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास उनकी कार के नजदीक मिला। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती खबरों में जहर खाने से मौत की आशंका जताई गई है, लेकिन मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। इस घटना से खेल जगत में शोक का माहौल है।

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जाफराबाद थाने में की जा रही है। घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। बताया गया है कि नीरज को अस्पताल ले जाने वाली महिला ने पुलिस को बताया कि दिसंबर 2025 से उसकी नीरज के साथ दोस्ती थी। वह मंगलवार को उनसे मिलने हरियाणा के सोनीपत गई थी। पूछताछ में महिला ने बताया कि उसने नीरज से कहा था कि अब वह उनके संपर्क में नहीं रह सकती।

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद नीरज महिला को अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से दिल्ली के मौजपुर में छोड़ने आए थे। रात करीब नौ बजे महिला को चिंता हुई और वह मौजपुर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास पहुंची। वहां उसने नीरज को सड़क पर कार के पास पड़ा हुआ पाया। इसके बाद वह उन्हें अस्पताल लेकर गई, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

नीरज यादव भारतीय पैरा एथलेटिक्स के जाने-माने खिलाड़ियों में शामिल रहे थे। सात वर्ष की उम्र में पोलियो होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। शुरुआत में उन्होंने व्हीलचेयर टेनिस में हाथ आजमाया और बाद में पैरा एथलेटिक्स को अपना करियर बनाया। अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वह एफ55 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते थे, जिसमें बैठकर भाला फेंक, चक्का फेंक और गोला फेंक जैसी स्पर्धाएं शामिल होती हैं।

नीरज ने वर्ष 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद वर्ष 2023 में चीन के हांगझोउ में हुए एशियाई पैरा खेलों में भी उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक में स्वर्ण पदक हासिल किए। हालांकि, बाद में डोपिंग नियमों के उल्लंघन के मामले में उनके वर्ष 2023 के दोनों स्वर्ण पदक छीन लिए गए। प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के मामले में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें चार साल के लिए निलंबित कर दिया गया था।

इस कार्रवाई का उनके खेल करियर पर गंभीर असर पड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पदक छिनने के बाद उन्हें मिलने वाली पुरस्कार राशि और सरकारी नौकरी की संभावनाओं को भी झटका लगा। भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण ने बताया कि डोपिंग मामले के सामने आने के बाद से वह नीरज के संपर्क में थे। कोच के मुताबिक, निलंबन के कारण नीरज आगामी आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों के चयन परीक्षणों में हिस्सा नहीं ले सकते थे।

कोच ने नीरज की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि डोपिंग मामले के बाद वह काफी तनाव में थे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें नीरज की मौत का सटीक कारण नहीं मालूम है। ऐसे में किसी एक घटना या परिस्थिति को उनकी मौत की वजह मानना उचित नहीं होगा। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकेंगे।

खेलों में शानदार उपलब्धियां हासिल करने वाले नीरज सोनीपत में अंशनीर स्पोर्ट्स अकादमी के नाम से ऑनलाइन खेल अकादमी भी चला रहे थे। वह विवाहित थे और उनके परिवार में पत्नी तथा तीन साल की बेटी हैं। उनकी मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक खिलाड़ी, जिसने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व किया, उसका इस तरह दुनिया से चले जाना बेहद दुखद है।

फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। नीरज यादव की मौत के पीछे की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल हैं, जिनका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा। इस घटना ने एक बार फिर खिलाड़ियों के करियर, खेल प्रतिबंधों के प्रभाव और कठिन परिस्थितियों में उन्हें मिलने वाले सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की जरूरत को सामने ला दिया है।

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