दुनिया की सात बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के संगठन G7 ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए परमाणु समझौते का स्वागत करते हुए इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया है। G7 नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।
बुधवार को जारी संयुक्त बयान में G7 देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना की और कहा कि उनकी मजबूत नेतृत्व क्षमता तथा मध्यस्थता करने वाले देशों के सहयोग से यह महत्वपूर्ण समझौता संभव हो पाया है।
नेताओं ने कहा कि यह समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने के साथ-साथ उसकी क्षेत्रीय और बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों से जुड़े खतरों को कम करने का एक ऐतिहासिक अवसर प्रदान करता है।
G7 देशों ने यह भी कहा कि वे इस समझौते के सफल क्रियान्वयन में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि आने वाले दौर की बातचीत में ईरान द्वारा क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा की गई सुरक्षा चुनौतियों का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
संयुक्त बयान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। नेताओं ने कहा कि भविष्य की सभी निगरानी प्रक्रियाओं में IAEA की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि समझौते का सही तरीके से पालन हो सके।
G7 देशों ने दोहराया कि उनकी सामूहिक नीति स्पष्ट है और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके अलावा मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई अहम बातें सामने आईं। G7 देशों ने लेबनान में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन किया और ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के पूर्ण निरस्त्रीकरण की मांग की।
नेताओं ने कहा कि लेबनान में हथियारों पर केवल राज्य का नियंत्रण होना चाहिए और देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। इसके लिए तत्काल और प्रभावी युद्धविराम की आवश्यकता बताई गई है।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी G7 देशों ने महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उन्होंने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य में निर्बाध समुद्री यातायात बहाल रखने पर जोर दिया।
नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री मार्गों का बिना किसी प्रतिबंध और बिना अतिरिक्त शुल्क के खुला रहना बेहद जरूरी है।
इसी उद्देश्य से फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के संयुक्त नेतृत्व में एक बहुराष्ट्रीय रक्षा पहल का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसका मकसद वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा बढ़ाना, वैश्विक शिपिंग कंपनियों का भरोसा बहाल करना और समुद्री बारूदी सुरंगों को पूरी तरह हटाना होगा।
इसके अलावा G7 देशों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक ऊर्जा भंडार को मजबूत करने का भी संकल्प लिया है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता आने वाले समय में कितना प्रभावी साबित होता है और क्या इससे मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित हो पाएगी।


