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Hormuz संकट से तेल बाजार में हड़कंप, Brent Crude के $120 पार जाने की आशंका

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी International Energy Agency यानी IEA ने चेतावनी दी है कि दुनिया जुलाई तक “रेड ज़ोन” जैसी गंभीर स्थिति में पहुंच सकती है। एजेंसी के मुताबिक लगातार आपूर्ति बाधित रहने और तेल भंडार कम होने से वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कुल ऊर्जा व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ईरान का इस क्षेत्र पर रणनीतिक प्रभाव होने के कारण यहां तनाव बढ़ने से तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है।

मौजूदा हालात में रोजाना करीब 1 करोड़ 40 लाख बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।

IEA प्रमुख Fatih Birol ने कहा है कि अगर यह संकट लंबा चला तो वैश्विक तेल बाजार “रेड ज़ोन” में पहुंच सकता है। इसका मतलब ऐसी स्थिति से है, जहां बाजार में मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त तेल भंडार नहीं बचेगा और किसी भी नए संकट से कीमतों में विस्फोटक बढ़ोतरी हो सकती है।

गौरतलब है कि मार्च महीने में IEA और उसके सदस्य देशों ने रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में जारी किया था ताकि सप्लाई संकट को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन मौजूदा हालात इतने गंभीर हैं कि यह अतिरिक्त भंडार भी तेजी से खत्म हो रहा है।

युद्ध से पहले Brent Crude की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 104 से 105 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच चुकी है। मई की शुरुआत में कीमतें 114 डॉलर तक पहुंच गई थीं। अब विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और बढ़ा, तो कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

इसका असर भारत समेत कई देशों में दिखने लगा है। भारत में विमान ईंधन यानी ATF की कीमतों में बीते महीनों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल में ATF करीब 25 प्रतिशत महंगा हुआ था। इसके बाद मई में भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की गई।

दिल्ली में विमान ईंधन की कीमत 1,511 डॉलर प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी। हालांकि राहत देने के लिए सरकार ने दिल्ली और मुंबई में ATF पर लगने वाले वैट में कटौती की है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। परिवहन, हवाई यात्रा और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ, तो दुनिया गंभीर ऊर्जा संकट में फंस सकती है। ऐसे में तेल कंपनियों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने होंगे, जिससे लागत और बढ़ सकती है।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी ठप पड़ी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिए हैं कि बातचीत विफल होने पर हालात और बिगड़ सकते हैं।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर मध्य पूर्व के हालात और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है, क्योंकि यही आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।

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