वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत को लगातार दूसरा बड़ा झटका लगा है। पहले ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ते हुए पांचवां स्थान हासिल किया और अब दक्षिण कोरिया भी भारतीय शेयर बाजार से आगे निकल गया है। इस बदलाव के बाद भारत दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की सूची में सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर उद्योग में आई तेज़ी प्रमुख कारण है। दक्षिण कोरिया और ताइवान की तकनीकी कंपनियों को AI आधारित तकनीकों की बढ़ती वैश्विक मांग का बड़ा फायदा मिला है, जिससे उनके शेयर बाजारों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
दक्षिण कोरिया ने कैसे मारी बाजी?
मौजूद आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजार का कुल बाजार मूल्य घटकर करीब 4.8 लाख करोड़ डॉलर रह गया है।
इस बढ़त में Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों की अहम भूमिका रही है। दोनों कंपनियां एआई मेमोरी चिप्स और उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक की बढ़ती मांग ने इन कंपनियों के मूल्यांकन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है, जिसका सीधा असर दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार पर पड़ा।
ताइवान की सफलता का कारण
इससे पहले ताइवान भी भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह Taiwan Semiconductor Manufacturing Company की जबरदस्त वृद्धि रही है।
टीएसएमसी दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी मानी जाती है और वैश्विक एआई उद्योग की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा लाभार्थी भी है। कंपनी के शेयरों में तेजी ने पूरे ताइवानी बाजार को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत के सामने क्या चुनौतियां हैं?
हाल के महीनों में भारतीय शेयर बाजार कई दबावों का सामना कर रहा है। रुपये में कमजोरी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और एआई क्षेत्र में वैश्विक स्तर की बड़ी कंपनियों की सीमित मौजूदगी को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
इसके अलावा, वैश्विक निवेशकों का ध्यान फिलहाल उन बाजारों की ओर अधिक है जहां एआई, चिप निर्माण और उन्नत तकनीक से जुड़ी कंपनियां बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
फिर भी अर्थव्यवस्था में भारत मजबूत
शेयर बाजार रैंकिंग में गिरावट के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति दक्षिण कोरिया से कहीं अधिक मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के अनुसार भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 4.15 लाख करोड़ डॉलर है, जबकि दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 1.93 लाख करोड़ डॉलर बताया जाता है।
भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार माना जाता है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि भारत के पास मजबूत आर्थिक आधार, विशाल उपभोक्ता बाजार और तेज विकास दर जैसी कई सकारात्मक ताकतें मौजूद हैं। हालांकि वैश्विक शेयर बाजार रैंकिंग में दोबारा ऊपर आने के लिए निवेशकों का भरोसा मजबूत करना और तकनीक आधारित क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित करना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल एआई और सेमीकंडक्टर उद्योग की लहर ने ताइवान और दक्षिण कोरिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है, जबकि भारत के सामने बाजार को नई गति देने की चुनौती खड़ी है।


