रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इस बार यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को में स्थित एक महत्वपूर्ण ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया है। इस सप्ताह दूसरी बार हुए ड्रोन हमले के बाद इलाके से काला धुआं और आग की ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस कार्रवाई को रूस के हालिया हमलों का उचित जवाब बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह हमला यूक्रेन के शहरों और नागरिकों पर लगातार हो रहे रूसी हमलों का जवाब है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाली सुविधाओं को निशाना बनाना बेहद जरूरी है।
जानकारी के मुताबिक, मॉस्को की कपोटन्या ऑयल रिफाइनरी रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह रिफाइनरी राजधानी मॉस्को के ईंधन इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हिस्सा है और शहर की पेट्रोल और डीजल की बड़ी जरूरतों को पूरा करती है। इसके अलावा यह सैन्य उपयोग के लिए एविएशन फ्यूल भी उपलब्ध कराती है।
बताया जा रहा है कि यूक्रेनी ड्रोन हमले में रिफाइनरी की ELOU-AVT-6 प्राइमरी ऑयल रिफाइनिंग यूनिट को नुकसान पहुंचा है। इस वजह से कुछ समय के लिए रिफाइनरी का संचालन प्रभावित हुआ। हालांकि, रूस की ओर से नुकसान के पूरे आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ढांचे पर इस तरह के हमले रूस की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमताओं पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस के कई ऊर्जा केंद्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
दूसरी तरफ रूस भी लगातार यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और शांति वार्ता की अपील कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर इसी तरह ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रहे तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इससे ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हमले के बाद रूस अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज करेगा या फिर दोनों देशों के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता निकलेगा। आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


