राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में गुरुवार को बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी DDA ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के तहत यमुना नदी के फ्लडप्लेन क्षेत्र में बने कई निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला और कई परिवारों के सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया।
अधिकारियों के अनुसार, यमुना बाजार का यह हिस्सा O-Zone के अंतर्गत आता है। O-Zone वह क्षेत्र होता है जिसे यमुना के फ्लडप्लेन यानी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखा जाता है। इस इलाके में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं होती और इसे अतिक्रमण मुक्त रखना पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक माना जाता है।
DDA ने 23 जून को इलाके के निवासियों को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जानकारी दी थी। नोटिस में कहा गया था कि NGT के निर्देशों के अनुसार यमुना नदी के फ्लडप्लेन क्षेत्र से सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाए जाएंगे। इसके बाद तय कार्यक्रम के अनुसार बुलडोजर और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और अभियान शुरू किया गया।
कार्रवाई के दौरान कई लोग अपने घरों से सामान निकालते हुए दिखाई दिए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें सीमित समय मिला, जिसके कारण वे अपना पूरा सामान सुरक्षित नहीं निकाल सके। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सामान ले जाने के लिए ट्रक और टेम्पो को इलाके में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायिक और पर्यावरणीय निर्देशों के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, यमुना के फ्लडप्लेन क्षेत्र में अवैध निर्माण न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं, बल्कि बाढ़ के दौरान लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकते हैं। इसलिए क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक था।
दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके सामने अब रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। कई परिवार वर्षों से इस इलाके में रह रहे थे और यहीं से अपनी आजीविका भी चला रहे थे। उनका कहना है कि कार्रवाई के बाद उनके पास वैकल्पिक आवास और रोजगार की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना फ्लडप्लेन की सुरक्षा पर्यावरण और जल संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं, ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मानवीय सहायता पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी होता है, ताकि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाया जा सके।
फिलहाल इलाके में प्रशासन की निगरानी जारी है और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने का अभियान नियमों और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप आगे भी जारी रहेगा। वहीं प्रभावित परिवारों को अब आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और संभावित पुनर्वास संबंधी निर्णयों का इंतजार है।


