महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो कथित तौर पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से दोस्ती करता था और फिर मिलने के बहाने उन्हें लूट का शिकार बनाता था। इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी एक डेटिंग ऐप पर फर्जी पहचान के जरिए युवकों से संपर्क करते थे। पहले कई दिनों तक बातचीत कर उनका भरोसा जीतते थे। जब सामने वाला व्यक्ति पूरी तरह विश्वास कर लेता, तब उससे मिलने का समय और स्थान तय किया जाता। इसके बाद कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया जाता था।
जांच के मुताबिक, 22 जून की रात एक डिलीवरी बॉय अपना काम खत्म कर स्कूटी से घर लौट रहा था। मांकापुर चौक के पास एक युवक ने उससे लिफ्ट मांगी। मदद के इरादे से डिलीवरी बॉय ने उसे अपनी स्कूटी पर बैठा लिया। कुछ दूरी पर पहुंचते ही उसके अन्य साथी भी वहां पहुंच गए। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद पीड़ित का अपहरण कर लिया गया।
आरोप है कि आरोपियों ने पीड़ित का मोबाइल फोन, वाहन की चाबी और एटीएम कार्ड अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर धमकाया गया और उसके बैंक खाते से पैसे भी निकलवाए गए। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने पहले भी इसी तरह की अन्य घटनाओं को अंजाम दिया है या नहीं।
नागपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद पांच संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं और पुलिस अब उनके मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनजान व्यक्ति से बातचीत करते समय पूरी सावधानी बरतें। केवल ऑनलाइन बातचीत के आधार पर किसी पर भरोसा न करें। यदि पहली बार किसी से मिलना हो, तो सार्वजनिक स्थान चुनें, अपने परिवार या दोस्तों को इसकी जानकारी दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया और डेटिंग प्लेटफॉर्म पर अपनी निजी जानकारी, बैंक संबंधी विवरण या लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें। किसी भी तरह की जल्दबाजी या भावनात्मक दबाव में निर्णय लेना जोखिम बढ़ा सकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म सुविधाजनक जरूर हैं, लेकिन उनका सुरक्षित और सतर्क होकर उपयोग करना बेहद जरूरी है। ऑनलाइन दोस्ती करते समय पहचान की पुष्टि करना और व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता देना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।


