मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बहरीन की राजधानी मनामा में अमेरिका और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सीरिया और लेबनान की स्थिति, गाजा के पुनर्निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की सह-अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ़ बिन राशिद अल ज़यानी ने की। इसमें GCC के सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ संगठन के महासचिव जासेम अल-बुदैवी भी शामिल हुए।
संयुक्त बयान में अमेरिका और GCC ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए काम करता रहेगा।
बैठक का सबसे अहम मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। मंत्रियों ने अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन यानी MOU का स्वागत किया। साथ ही पाकिस्तान और कतर द्वारा दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने के प्रयासों की भी सराहना की गई। नेताओं ने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति और तनाव में कमी लाने के लिए सभी पक्षों को एकजुट रहना होगा।
हालांकि, संयुक्त बयान में यह भी साफ किया गया कि अमेरिका और GCC का साझा लक्ष्य ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने या हासिल करने से रोकना है। बैठक में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन तकनीक और क्षेत्र में सक्रिय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन जैसी गतिविधियां मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समुद्री आवाजाही पर भी विशेष जोर दिया गया। नेताओं ने कहा कि यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाजों की स्वतंत्र और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित रहनी चाहिए। किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क, टोल या नियंत्रण लागू करने के प्रयासों का अमेरिका और GCC ने विरोध किया।
इसके अलावा, होर्मुज क्षेत्र में फंसे 11 हजार से अधिक नाविकों की सुरक्षित निकासी के लिए ओमान और इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन यानी IMO की पहल का भी स्वागत किया गया।
संयुक्त बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में ईरान के साथ होने वाला कोई भी व्यापार या निवेश पूरी तरह शर्तों के अधीन होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेहरान MOU और भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते का पूरी तरह पालन करता है या नहीं। साथ ही, ईरान को ऐसी गतिविधियों से दूरी बनानी होगी जो क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देती हैं।
बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण, सीरिया में राजनीतिक समाधान और लेबनान में स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर भी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। सभी देशों ने कहा कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति केवल कूटनीति, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के जरिए ही संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मनामा बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा और राजनीतिक संतुलन को लेकर कई चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में अमेरिका और GCC की यह साझा रणनीति आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि ईरान इन संदेशों और भविष्य की बातचीत पर क्या रुख अपनाता है।


