गुजरात के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कस्टम्स विभाग ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक यात्री के पास से करीब 11 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक मारिजुआना बरामद किया है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस पूरी कार्रवाई में सबसे अहम भूमिका एयरपोर्ट पर तैनात स्निफर डॉग ने निभाई, जिसने ट्रॉली बैग के पास पहुंचते ही संदिग्ध गंध का संकेत दिया। इसके बाद अधिकारियों ने बैग की गहन जांच की और बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद कर आरोपी यात्री को गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार, आरोपी यात्री 28 जून को थाई एयरवेज की फ्लाइट TG-343 से बैंकॉक से अहमदाबाद पहुंचा था। एयरपोर्ट पर कस्टम्स विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) द्वारा नियमित जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान चेक-इन बैगेज की स्क्रीनिंग के समय स्निफर डॉग एक ट्रॉली बैग के पास जाकर रुक गया और लगातार संदिग्ध गतिविधि का संकेत देने लगा। प्रशिक्षित डॉग के इस व्यवहार को देखते हुए अधिकारियों ने बैग को अलग कर विस्तृत जांच शुरू की।
बैग खोलने पर उसके अंदर सावधानीपूर्वक छिपाए गए पांच सिल्वर रंग के पैकेट मिले। जब इन पैकेटों की जांच की गई तो उनमें से लगभग 11 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक मारिजुआना बरामद हुआ। अधिकारियों के अनुसार यह अत्यधिक गुणवत्ता वाला मादक पदार्थ है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
कस्टम्स अधिकारियों ने बैगेज टैग के माध्यम से संबंधित यात्री की पहचान की और उसे तुरंत हिरासत में ले लिया। पूछताछ के बाद आरोपी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ मादक पदार्थ एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी गिरोह का हिस्सा है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि हाइड्रोपोनिक मारिजुआना सामान्य गांजे की तुलना में अधिक शक्तिशाली माना जाता है और इसकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक रहती है। इसी कारण इसकी तस्करी के लिए तस्कर नए-नए तरीके अपनाते हैं। कभी खाद्य पदार्थों, कभी कपड़ों और कभी सामान के गुप्त हिस्सों में ड्रग्स छिपाकर सीमाओं के पार भेजने की कोशिश की जाती है। हालांकि आधुनिक स्कैनिंग तकनीक और प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की वजह से ऐसे मामलों का लगातार खुलासा हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। एयरपोर्ट पर एक्स-रे स्कैनर, हाई-टेक स्क्रीनिंग सिस्टम और प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स की मदद से संदिग्ध सामान की पहचान पहले से अधिक प्रभावी तरीके से की जा रही है। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई इसी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का परिणाम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग्स तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज और विशेष रूप से युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई करना बेहद जरूरी होता है, ताकि अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई चेन को रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियां लगातार अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं और विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ भी सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रही हैं।
फिलहाल आरोपी से विस्तृत पूछताछ जारी है। जांच अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ड्रग्स की यह खेप भारत में किस व्यक्ति या गिरोह तक पहुंचाई जानी थी। इसके अलावा आरोपी के यात्रा रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, वित्तीय लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है तो आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
कस्टम्स विभाग ने स्पष्ट किया है कि देश के सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। यात्रियों से भी अपील की गई है कि वे किसी अज्ञात व्यक्ति का सामान अपने साथ लेकर यात्रा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।


