देश की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर गुजरात से सामने आई है। गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी ATS ने एक ऐसे मॉड्यूल का खुलासा किया है, जो जांच एजेंसी के अनुसार प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा से प्रभावित था। जांच में दावा किया गया है कि इस मॉड्यूल से जुड़े आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से विस्फोट करने की तकनीक सीखने और उसका परीक्षण करने की कोशिश कर रहे थे।
गुजरात ATS के अनुसार, इस मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
ATS के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि एजेंसी को सूचना मिली थी कि कुछ लोग कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा से प्रभावित होकर लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे थे। इसी सूचना के आधार पर जांच शुरू की गई और शुरुआती कार्रवाई में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद अदालत से आरोपियों की रिमांड ली गई और पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ाया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मुख्य आरोपी अमीन शेरा और उसके कुछ साथी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा स्थानीय बाजार से गन पाउडर और अन्य सामग्री खरीदते थे। आरोप है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर वे विस्फोट की प्रक्रिया को समझने और उसका परीक्षण करने की कोशिश कर रहे थे।
ATS का कहना है कि यह गतिविधियां पिछले लगभग दो साल से जारी थीं। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कथित परीक्षण कब और किन स्थानों पर किए गए। इस संबंध में जांच अभी जारी है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्य कौन-कौन हैं, उन्हें आर्थिक या तकनीकी मदद कहां से मिल रही थी और उनका अंतिम उद्देश्य क्या था।
फिलहाल इस मामले में जांच प्रारंभिक चरण में है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
भारत में सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर ऐसे संदिग्ध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करती रही हैं। उनका उद्देश्य संभावित खतरों को समय रहते रोकना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
गुजरात ATS की इस कार्रवाई को भी सुरक्षा एजेंसियों की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यदि जांच में सामने आए आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जाएगा।
अब सभी की नजर ATS की आगे की जांच पर है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि इस कथित मॉड्यूल का नेटवर्क कितना बड़ा था, क्या इसके तार किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से जुड़े थे और क्या इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


