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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर, प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार तत्काल प्रभाव से प्रह्लाद जोशी संभालेंगे।

सरकार के इस फैसले को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। नए प्रभार के साथ प्रह्लाद जोशी के सामने मंत्रालय के कामकाज को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने और विभिन्न लंबित मुद्दों पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी होगी।

इसी बीच, नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने अपने 36 दिनों से जारी प्रदर्शन को समाप्त करने की घोषणा की है। संगठन का दावा है कि उसकी प्रमुख मांगों पर सरकार के साथ सहमति बनी है। हालांकि, इन दावों के संबंध में संबंधित पक्षों की आधिकारिक स्थिति और विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

कॉजपा के प्रवक्ता सौरव घोष ने कहा कि संगठन फिलहाल देशभर में चल रहे सभी विरोध प्रदर्शनों को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर रहा है। उनके अनुसार, सरकार और संगठन के बीच परीक्षा प्रणाली में सुधार सहित कई मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहेगी और चार सप्ताह बाद अगली बैठक प्रस्तावित है।

रिपोर्ट के अनुसार, संगठन का यह भी दावा है कि सरकार ने नीट विवाद से जुड़े कुछ अन्य मुद्दों पर भी सकारात्मक रुख अपनाया है। इनमें कथित तौर पर प्रभावित अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने तथा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर विचार करने जैसी बातें शामिल हैं। इन दावों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।

सरकार और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने आगे संवाद जारी रखने और तय समयसीमा के भीतर सहमत बिंदुओं पर काम करने की बात कही।

शिक्षा मंत्रालय में हुए इस बदलाव को आने वाले समय में परीक्षा प्रणाली, शिक्षा सुधार और प्रशासनिक फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नए नेतृत्व में शिक्षा मंत्रालय किन प्राथमिकताओं के साथ आगे बढ़ता है और प्रस्तावित सुधारों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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