सोशल मीडिया पर बढ़ते फेक अकाउंट और AI से तैयार की जा रही नकली तस्वीरों के बीच मेटा (Meta) ने फेसबुक यूजर्स के लिए एक नया फीचर पेश किया है। कंपनी का कहना है कि इस फीचर का उद्देश्य असली और नकली प्रोफाइल के बीच अंतर करना आसान बनाना है, ताकि यूजर्स ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी पहचान से बच सकें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण आज फेक फोटो, वीडियो, मैसेज और यहां तक कि नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। ऐसे में कई लोग फर्जी अकाउंट बनाकर दूसरों की पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए फेसबुक ने नया Facebook Verified सिस्टम पेश किया है।
क्या है Facebook Verified?
Facebook Verified एक ऐसा वेरिफिकेशन सिस्टम है, जिसके जरिए यूजर्स की पहचान की पुष्टि की जाती है। वेरिफाइड प्रोफाइल पर एक विशेष बैज दिखाई देता है, जिससे अन्य लोगों को यह समझने में आसानी होती है कि संबंधित अकाउंट वास्तविक है। इससे फेक प्रोफाइल और असली प्रोफाइल के बीच अंतर करना आसान हो जाता है।
फ्री वेरिफिकेशन सिस्टम क्या है?
मेटा ने कुछ यूजर्स के लिए एक फ्री वेरिफिकेशन सिस्टम की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में यूजर्स से सरकारी पहचान पत्र या अन्य आवश्यक जानकारी लेकर उनकी पहचान की पुष्टि की जा सकती है। पहचान सत्यापित होने के बाद योग्य अकाउंट पर वेरिफाइड बैज दिया जाएगा। यह सुविधा चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग क्षेत्रों और यूजर्स के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है।
यूजर्स को क्या मिलेगा फायदा?
इस नए फीचर से फर्जी अकाउंट की पहचान करना आसान होगा। यदि कोई AI की मदद से किसी व्यक्ति की नकली फोटो या प्रोफाइल बनाता है, तो वेरिफाइड बैज के जरिए असली अकाउंट की पहचान की जा सकेगी। इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर फ्रॉड के मामलों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
AI के दौर में क्यों जरूरी है यह कदम?
AI तकनीक ने जहां कई काम आसान बनाए हैं, वहीं इसके जरिए डीपफेक फोटो, वीडियो और नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल भी तेजी से बनाए जा रहे हैं। ऐसे में यूजर्स के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सा अकाउंट असली है और कौन-सा नकली। मेटा का मानना है कि नया वेरिफिकेशन सिस्टम सोशल मीडिया को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
ध्यान देने वाली बात
मेटा पहले से Meta Verified नाम की एक पेड सेवा भी उपलब्ध कराता है। यदि किसी क्षेत्र में फ्री वेरिफिकेशन शुरू किया जाता है, तो उसकी पात्रता, उपलब्धता और प्रक्रिया मेटा की आधिकारिक घोषणा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए यूजर्स को केवल फेसबुक ऐप या मेटा के आधिकारिक नोटिफिकेशन के माध्यम से ही वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनानी चाहिए और किसी तीसरे पक्ष पर भरोसा नहीं करना चाहिए।


