अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान के खिलाफ किसी नए बड़े सैन्य हमले को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, रक्षा अधिकारियों और कैबिनेट सदस्यों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यह स्थायी फैसला नहीं है और हालात बदलने पर सैन्य विकल्प खुले रहेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक के दौरान अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी कि यदि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान जारी रखा गया, तो मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सेना के पास महत्वपूर्ण एयर डिफेंस हथियारों का भंडार तेजी से कम हो सकता है। अधिकारियों ने विशेष रूप से पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य रक्षा प्रणालियों के सीमित स्टॉक को लेकर चिंता जताई।
सैन्य अधिकारियों का कहना था कि हाल के महीनों में ईरान और उसके समर्थित समूहों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ने के कारण अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी एयर डिफेंस प्रणालियों का व्यापक उपयोग किया है। यदि इन प्रणालियों का लगातार इस्तेमाल जारी रहता है, तो उनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सैन्य नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा समय में नए हमलों की बजाय रक्षा संसाधनों को सुरक्षित रखना अधिक जरूरी है। अधिकारियों का आकलन है कि यदि एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर पड़ता है, तो ईरान या उसके सहयोगी समूह अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। इसी वजह से फिलहाल सैन्य कार्रवाई की गति धीमी रखने की सलाह दी गई।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में ईरान या उसके समर्थित संगठन अमेरिकी सैनिकों, सैन्य ठिकानों या सहयोगी देशों पर हमला करते हैं, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। प्रशासन का कहना है कि वर्तमान प्राथमिकता क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रक्षा संसाधनों का संतुलित उपयोग करना है।
इस बीच ईरान की ओर से भी कड़े बयान सामने आए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी कार्रवाई जारी रहती है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान और उसके सहयोगी किसी भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य तैयारियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन क्षेत्र की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।


