Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

NEET-UG 2026: ‘मेरे 410 नंबर बनने चाहिए, 340 कैसे?’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने NTA को भेजा नोटिस

NEET-UG 2026 परीक्षा के परिणाम को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि उनके वास्तविक अंक 410 बनने चाहिए थे, जबकि जारी किए गए स्कोरकार्ड में केवल 340 अंक दर्ज किए गए हैं। इस मामले ने NEET-UG की मूल्यांकन प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्रा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

दादर (मुंबई) की रहने वाली 18 वर्षीय स्नेहा गमाने ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने अंकों के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। उनका कहना है कि उनके स्कोर में 70 अंकों का अंतर है, जिससे उनके मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने NTA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

OMR शीट और Answer Key का किया मिलान

याचिका के अनुसार, स्नेहा गमाने ने अपनी डाउनलोड की गई OMR (ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन) उत्तर-पत्रक का मिलान टेस्ट बुकलेट कोड-80 की आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) से किया।

इस मिलान में उन्होंने दावा किया कि उनके:

113 उत्तर सही थे,

46 उत्तर गलत थे,

और 1 प्रश्न ड्रॉप किया गया था।

इन आंकड़ों के आधार पर उनका कहना है कि उनके कुल 410 अंक बनने चाहिए थे, लेकिन NTA द्वारा जारी स्कोरकार्ड में 340 अंक दर्ज किए गए।

कोर्ट से क्या मांग की गई?

स्नेहा गमाने की ओर से अधिवक्ता विवेक आरोटे ने याचिका दाखिल की है। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि:

NEET-UG 2026 की OMR शीट का दोबारा मूल्यांकन कराया जाए।

सही अंकों के आधार पर नई मार्कशीट जारी की जाए।

यदि मूल्यांकन में त्रुटि पाई जाती है, तो उसके अनुसार आगे की प्रवेश प्रक्रिया में आवश्यक राहत दी जाए।

NTA से मांगा गया जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए NTA को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब एजेंसी को अदालत में यह स्पष्ट करना होगा कि छात्रा के अंकों की गणना किस आधार पर की गई और क्या मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि हुई है।

मेडिकल प्रवेश पर पड़ सकता है असर

NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है और कुछ अंकों का अंतर भी छात्रों की रैंक और कॉलेज आवंटन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यदि छात्रा का दावा सही पाया जाता है, तो इसका असर उनकी काउंसलिंग और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पर पड़ सकता है।

अब सभी की नजरें NTA के जवाब और बॉम्बे हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles