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PV Sindhu के बाद अब Tanvi और Ashmita को तराश रहे Park Tae-sang, भारतीय बैडमिंटन को मिल रही नई उड़ान

भारतीय बैडमिंटन में लगातार दो सप्ताह में मिली दो बड़ी जीत ने कोच पार्क ताए-सांग की ट्रेनिंग पद्धति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पहले 17 साल की तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन में खिताब अपने नाम किया और इसके ठीक सात दिन बाद 26 साल की अश्मिता चालिहा ने कोरिया मास्टर्स का खिताब जीतकर शानदार वापसी की। दोनों अलग-अलग खिलाड़ियों की इस सफलता ने भारतीय बैडमिंटन में उभरती नई प्रतिभाओं को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

दक्षिण कोरिया के पार्क ताए-सांग भारतीय बैडमिंटन के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। उन्होंने लंबे समय तक पीवी सिंधू के साथ काम किया और उनके मार्गदर्शन में सिंधू ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। सिंधू के साथ उनकी साझेदारी खत्म होने के बाद पार्क ने युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने का फैसला किया और भारतीय बैडमिंटन की अगली पीढ़ी तैयार करने की जिम्मेदारी संभाली।

पार्क का मानना है कि सिंधू के साथ काम करना एक अलग चुनौती थी, क्योंकि उस समय सिंधू पहले ही विश्व चैंपियन बन चुकी थीं और उनके आसपास अनुभवी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की मजबूत टीम थी। इसके बाद जब उन्हें युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने का मौका मिला तो उन्होंने शुरुआत बिल्कुल अलग स्तर से करने का फैसला किया। उनका लक्ष्य ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करना था, जो आने वाले वर्षों में भारतीय बैडमिंटन की जिम्मेदारी संभाल सकें।

गुवाहाटी स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में करीब तीन साल तक युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने के बाद अब पार्क की मेहनत का असर दिखाई देने लगा है। तन्वी शर्मा और अश्मिता चालिहा की लगातार दो सप्ताह में मिली खिताबी जीत को इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।

तन्वी शर्मा ने महज 17 साल की उम्र में ताइपे ओपन का खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। यह उनका पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब था। कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तन्वी की जीत के ठीक एक सप्ताह बाद अश्मिता चालिहा ने कोरिया मास्टर्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।

अश्मिता की जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि वह घुटने की गंभीर चोट के बाद वापसी कर रही थीं। चोट के कारण उनके करियर पर भी सवाल खड़े हुए थे, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए फाइनल में जीत हासिल की और दिखा दिया कि मुश्किल परिस्थितियों के बाद भी शीर्ष स्तर पर वापसी संभव है।

पार्क ताए-सांग ने लगातार दो खिताब जीतने पर खुशी जाहिर की है। उनके लिए यह सिर्फ दो टूर्नामेंट की जीत नहीं है, बल्कि युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की उनकी लंबी योजना का शुरुआती नतीजा है। हालांकि, पार्क इन उपलब्धियों को अंतिम लक्ष्य नहीं मानते। उनका कहना है कि सुपर 300 स्तर के दो खिताब निश्चित तौर पर अच्छी उपलब्धि हैं, लेकिन खिलाड़ियों को अब इससे आगे बढ़ने की जरूरत है।

भारतीय कोच की नजर अब 500, 750 और 1000 स्तर के बड़े टूर्नामेंटों पर है। उनका लक्ष्य तन्वी और अश्मिता को लगातार बेहतर प्रतियोगिताओं में खेलने का अनुभव देना है, ताकि वे विश्व स्तर के मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ खुद को साबित कर सकें।

पार्क के अनुसार, दोनों खिलाड़ियों का बड़ा लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक है। ओलंपिक क्वालीफिकेशन की दौड़ शुरू होने से पहले खिलाड़ियों को अपनी रैंकिंग और प्रदर्शन में लगातार सुधार करना होगा। इसी वजह से आने वाला समय तन्वी और अश्मिता दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अश्मिता की कोरिया मास्टर्स जीत से उनकी विश्व रैंकिंग में भी सुधार होने की उम्मीद है। बेहतर रैंकिंग मिलने के बाद उनके लिए बड़े स्तर के टूर्नामेंटों में प्रवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं तन्वी के लिए भी पहला बड़ा खिताब उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।

भारतीय बैडमिंटन में लंबे समय से पीवी सिंधू, साइना नेहवाल और अन्य अनुभवी खिलाड़ियों के बाद अगली पीढ़ी को लेकर चर्चा होती रही है। ऐसे में तन्वी और अश्मिता जैसी खिलाड़ियों का उभरना भारतीय बैडमिंटन के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। पार्क ताए-सांग की कोशिश है कि इन खिलाड़ियों को सिर्फ एक-दो टूर्नामेंट जीतने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें लंबे समय तक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार किया जाए।

लगातार दो सप्ताह में दो सुपर 300 खिताब भारतीय बैडमिंटन के लिए निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ाने वाली उपलब्धि है। लेकिन असली परीक्षा अब बड़े टूर्नामेंटों में होगी। अगर तन्वी और अश्मिता अपनी लय बरकरार रखते हुए 500, 750 और 1000 स्तर के मुकाबलों में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं, तो 2028 ओलंपिक के लिए भारत की उम्मीदें और मजबूत हो सकती हैं।

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