फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उनकी व्यावसायिक योजनाओं और व्यक्तिगत आरोपों को लेकर विश्व फुटबॉल में अलग-अलग राय सामने आ रही है। इसी बीच फीफा ने अपने अध्यक्ष के समर्थन में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी भी नेतृत्व परिवर्तन के लिए संस्था के नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
विवाद की शुरुआत फीफा की उस व्यावसायिक योजना से हुई, जिसके तहत विश्व कप और अन्य बड़ी प्रतियोगिताओं से जुड़े व्यावसायिक अधिकारों में हिस्सेदारी के जरिए करीब 4.2 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी की गई थी। इस प्रस्ताव को यूरोपीय फुटबॉल संघ समेत कई राष्ट्रीय संघों और फीफा के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की आलोचना का सामना करना पड़ा। विरोध बढ़ने के बाद इन्फेंटिनो के इस्तीफे की मांग भी उठने लगी।
इसी विवाद के बीच मोरक्को में फीफा के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक के बाद फीफा ने अपने 211 सदस्य संघों से प्रस्ताव को लेकर हुई गलतियों के लिए माफी मांगी और इन्फेंटिनो के नेतृत्व के प्रति अपना समर्थन दोहराया। हालांकि, यूरोपीय फुटबॉल संघ की ओर से यह संकेत दिया गया कि इन्फेंटिनो के नेतृत्व को लेकर पहले जैसा भरोसा नहीं रह गया है।
शनिवार को जारी बयान में फीफा ने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए बिना कहा कि उसके अध्यक्ष के नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिशें जारी हैं। संस्था ने हाल में सामने आई कुछ खबरों और आरोपों को आधारहीन और गलत बताया है। फीफा ने यह भी कहा कि गलत या भ्रामक जानकारी सामने आने पर वह उसका मजबूती से जवाब देगा।
विवाद के बीच ब्रिटेन के एक समाचार पत्र की रिपोर्ट में इन्फेंटिनो के यूईएफए में महासचिव रहने के दौरान एक पूर्व कर्मचारी को किए गए भुगतान का जिक्र किया गया। रिपोर्ट में इन्फेंटिनो और उस व्यक्ति के बीच कथित निजी संबंधों का दावा भी किया गया। इन्फेंटिनो ने इन आरोपों से इनकार किया है और फीफा ने भी इन्हें बेबुनियाद बताया है।
यूईएफए ने हालांकि यह स्वीकार किया कि संबंधित पूर्व कर्मचारी को विदाई भुगतान के साथ स्थानीय कारोबारी विद्यालय में प्रबंधन की पढ़ाई की फीस भी दी गई थी। संस्था की ओर से इस भुगतान को लेकर अलग स्पष्टीकरण दिया गया है। ऐसे में इस मुद्दे ने फीफा अध्यक्ष के खिलाफ चल रहे विवाद को और हवा दे दी है।
फीफा ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि इन्फेंटिनो का चुनाव सदस्य संघों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुआ है और वह अभी भी सदस्य देशों के समर्थन से अपने पद पर हैं। संस्था के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति या संगठन को उनके नेतृत्व को चुनौती देनी है तो उसे तय नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ना होगा।
फीफा का कहना है कि जिन लोगों के पास सदस्य संघों का पर्याप्त समर्थन नहीं है, उन्हें आरोपों या गलत सूचनाओं के जरिए वह समर्थन हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया जाना चाहिए।
इन्फेंटिनो अगले फीफा कांग्रेस में चौथे कार्यकाल के लिए दावेदारी पेश करने की तैयारी में हैं। फिलहाल उनके खिलाफ कोई स्पष्ट मजबूत उम्मीदवार सामने नहीं आया है। हालांकि, यूईएफए के साथ बढ़ता टकराव और उनके खिलाफ उठ रहे आरोप आने वाले समय में उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
दूसरी ओर, अफ्रीकी फुटबॉल संगठन ने इन्फेंटिनो के नेतृत्व का समर्थन किया है। दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल संगठन ने भी सदस्य देशों की पूरी प्रक्रिया के बिना किसी तरह की हटाने की कार्रवाई का विरोध किया है। मेक्सिको फुटबॉल महासंघ ने भी कहा है कि फीफा अध्यक्ष से जुड़े किसी फैसले को निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही लिया जाना चाहिए।
ऐसे में जियानी इन्फेंटिनो को लेकर विवाद सिर्फ उनके व्यक्तिगत नेतृत्व तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब फीफा के व्यावसायिक मॉडल, विश्व कप के अधिकारों, निजी निवेश और वैश्विक फुटबॉल प्रशासन में सत्ता के संतुलन से भी जुड़ गया है। आने वाले महीनों में सदस्य संघों का रुख यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि इन्फेंटिनो की स्थिति कितनी मजबूत रहती है और फीफा के भीतर चल रही यह खींचतान किस दिशा में जाती है।


