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“बहरे होने का नाटक न करें CM फडणवीस!” संजय राउत की चेतावनी, MPSC अभ्यर्थियों की मांग नहीं मानी तो महाराष्ट्रभर में आंदोलन का दावा

महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी गरमाता नजर आ रहा है। पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने मुलाकात की और सरकार पर छात्रों की आवाज नहीं सुनने का आरोप लगाया। राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा कि वे छात्रों की मांगों को नजरअंदाज न करें और चेतावनी दी कि अगर अभ्यर्थियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में फैल सकता है।

पुणे में चल रहे इस आंदोलन में अभ्यर्थी महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में आयोग के अध्यक्ष को हटाना और परीक्षा प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना शामिल है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मामलों में उन्हें स्पष्टता और भरोसे की जरूरत है।

संजय राउत ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की और उनके आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि पुणे में छात्रों की ओर से लगाए जा रहे नारे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचने चाहिए। राउत ने मुख्यमंत्री पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने से बच रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने फडणवीस से “बहरे होने का नाटक” नहीं करने की अपील की।

राउत ने प्रदर्शन स्थल को महाराष्ट्र का ‘जंतर-मंतर’ बताया। उनका कहना था कि जिस तरह जंतर-मंतर पर आंदोलन अपनी मांगें पूरी होने तक जारी रहते हैं, उसी तरह पुणे में भी अभ्यर्थियों को अपनी मांगों को लेकर मजबूती से खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया और कहा कि यह केवल कुछ छात्रों का मुद्दा नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के युवाओं से जुड़ा विषय है।

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि आखिर सरकार के साथ बातचीत के बावजूद आंदोलन क्यों जारी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से छात्रों की कई मांगों पर कदम उठाने और परीक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई थी। सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई थी, जिसके बाद परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों पर आश्वासन दिए गए।

इसके बावजूद छात्रों की कुछ प्रमुख मांगें पूरी तरह हल नहीं होने को लेकर आंदोलन जारी रहा। खास तौर पर MPSC अध्यक्ष को हटाने की मांग पर प्रदर्शनकारी अब भी जोर दे रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि MPSC अध्यक्ष एक संवैधानिक पद है और उन्हें हटाने की प्रक्रिया राज्य सरकार के सीधे अधिकार में नहीं आती।

यही मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। संजय राउत ने सवाल उठाया कि अगर सरकार का दावा है कि छात्रों की मांगें मान ली गई हैं, तो फिर छात्र सड़कों पर क्यों बैठे हैं? उनका कहना है कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों और उनके प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी शिकायतों को समझना चाहिए।

राउत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर छात्रों की मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो यह आंदोलन पुणे तक सीमित नहीं रहेगा। उनके मुताबिक, महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से युवा इस मुद्दे से जुड़ सकते हैं और आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है। उन्होंने छात्रों के समर्थन में अपनी राजनीतिक आवाज को और मुखर किया है।

इस बीच आंदोलन को अन्य राजनीतिक नेताओं का भी समर्थन मिलने की बात सामने आई है। एनसीपी शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार भी प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ नजर आए हैं। शरद पवार की ओर से भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से छात्रों के साथ बातचीत करने की अपील की गई है। इससे MPSC का यह विवाद अब परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ महाराष्ट्र की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, इस पूरे मामले में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। सरकार की ओर से कुछ मांगों पर कार्रवाई और आश्वासन दिए जाने की बात कही गई है, जबकि प्रदर्शनकारी कुछ प्रमुख मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी मतभेद के कारण आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और MPSC अभ्यर्थियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकल पाएगा? क्या आयोग के अध्यक्ष को हटाने की मांग पर कोई रास्ता निकलेगा? या फिर पुणे से शुरू हुआ यह आंदोलन वास्तव में महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों तक पहुंचेगा?

फिलहाल पुणे में अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है और संजय राउत के समर्थन के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और छात्रों की मांगों पर क्या फैसला होता है, यही इस पूरे विवाद की अगली दिशा तय करेगा।

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