Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

हॉकी जर्सी पर बवाल! केसरिया पहनकर उतरी टीम इंडिया, नीदरलैंड्स से 0-2 की हार

हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय महिला टीम की केसरिया जर्सी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नीदरलैंड्स के खिलाफ अहम मुकाबले में भारतीय टीम अपनी पारंपरिक नीली जर्सी के बजाय केसरिया रंग की जर्सी में मैदान पर उतरी। खास बात यह रही कि मुकाबला नीली टर्फ पर खेला गया और नीदरलैंड्स की टीम भी नीली जर्सी में नजर आई। इसके बाद हॉकी इंडिया के विजिबिलिटी वाले तर्क पर सवाल उठने लगे हैं।

दरअसल, कई दशकों से नीला रंग भारतीय खेलों की पहचान रहा है। क्रिकेट से लेकर हॉकी तक, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय टीमों को नीली जर्सी में देखने की परंपरा रही है। लेकिन हॉकी वर्ल्ड कप से पहले हॉकी इंडिया ने पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए नई केसरिया जर्सी पेश की। इस बदलाव ने शुरुआत से ही खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने के पीछे विजिबिलिटी को मुख्य वजह बताया था। संस्था के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी में इस्तेमाल होने वाली नीली सिंथेटिक टर्फ पर नीली जर्सी खिलाड़ियों के लिए कम स्पष्ट दिखाई दे सकती है। ऐसे में केसरिया रंग को इसलिए चुना गया ताकि मैदान पर खिलाड़ियों की विजिबिलिटी बेहतर हो और खेल के दौरान उन्हें पहचानना आसान रहे।

लेकिन नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले में यह तर्क सवालों के घेरे में आ गया। नीली टर्फ पर नीदरलैंड्स की टीम नीली जर्सी पहनकर उतरी। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर हॉकी जगत तक इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि अगर नीली जर्सी नीली टर्फ पर विजिबिलिटी की समस्या पैदा करती है, तो नीदरलैंड्स की टीम उसी तरह की टर्फ पर नीली जर्सी में कैसे खेल रही है।

इसी बीच भारतीय टीम की जर्सी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। कुछ पूर्व खिलाड़ियों और पूर्व कप्तानों ने केसरिया रंग को लेकर सवाल उठाए और इसे ‘भगवाकरण’ से जोड़कर अपनी प्रतिक्रिया दी। दूसरी ओर हॉकी इंडिया लगातार यह कहता रहा है कि जर्सी का रंग किसी राजनीतिक वजह से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की विजिबिलिटी को ध्यान में रखकर चुना गया है।

हालांकि जर्सी विवाद के बीच मैदान पर भारतीय टीम को नीदरलैंड्स के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। दुनिया की मजबूत टीम नीदरलैंड्स ने भारत को 2-0 से हराया। भारतीय टीम ने डिफेंस में अच्छा प्रदर्शन किया और कई मौकों पर नीदरलैंड्स के हमलों को रोकने में सफलता हासिल की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी गोल करने के मौके को भुना नहीं सके।

नीदरलैंड्स ने अपने दोनों गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए किए। भारतीय गोलकीपरों और डिफेंस ने कई शानदार बचाव किए, लेकिन नीदरलैंड्स के लगातार दबाव के सामने टीम को अंततः दो गोल गंवाने पड़े। इस हार के बाद भारतीय टीम के लिए सेमीफाइनल की राह मुश्किल जरूर हुई है, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।

अब भारतीय महिला हॉकी टीम के सामने ऑस्ट्रेलिया की चुनौती है। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए यह मुकाबला भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम को डिफेंस की मजबूती के साथ-साथ अटैक में भी बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी जरूरत पेनल्टी कॉर्नर के मौके बनाना और उन्हें गोल में बदलना होगी। नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भारतीय टीम को ज्यादा मौके नहीं मिले और जो मौके बने, उन्हें गोल में बदलने में सफलता नहीं मिली। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस कमी को दूर करना बेहद जरूरी होगा।

भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में अब तक कई अच्छे प्रदर्शन किए हैं। टीम ने मजबूत चीन को ड्रॉ पर रोका, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की और इंग्लैंड के खिलाफ भी गोलरहित ड्रॉ खेला। इससे साफ है कि भारतीय टीम में बड़े मुकाबलों में मजबूत टीमों को चुनौती देने की क्षमता मौजूद है।

अब सवाल जर्सी के रंग से ज्यादा मैदान पर प्रदर्शन का है। केसरिया जर्सी को लेकर विवाद अपनी जगह है, लेकिन भारतीय महिला टीम के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहना है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में टीम अगर अपने डिफेंस को मजबूत रखते हुए गोल करने के मौकों का फायदा उठाती है, तो टूर्नामेंट में उसकी उम्मीदें फिर से मजबूत हो सकती हैं।

फिलहाल नीदरलैंड्स के खिलाफ हार के बाद केसरिया जर्सी भी चर्चा में है और भारतीय टीम का प्रदर्शन भी। हॉकी इंडिया के विजिबिलिटी तर्क पर उठ रहे सवालों के बीच अब सबकी नजर अगले मुकाबले पर है। देखना होगा कि टीम इंडिया केसरिया जर्सी में आगे क्या कमाल करती है और क्या ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल की रेस में वापसी कर पाती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles