उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। शिक्षा व्यवस्था को लेकर बोलते हुए सीएम योगी ने सपा सरकार के कार्यकाल का जिक्र किया और आरोप लगाया कि उस दौरान जनता के हितों की अनदेखी की गई और गरीबों के साथ न्याय नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार हुआ है और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया है।
अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए परिवारवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान विकास और जनकल्याण की बजाय कुछ खास लोगों के हितों को प्राथमिकता दी गई। योगी ने कहा कि उनकी सरकार में गरीब, किसान, युवा और आम लोगों को ध्यान में रखकर योजनाएं लागू की जा रही हैं।
सीएम योगी ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया गया है। सरकार का जोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने पर है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आज उनकी सरकार के कामों को लेकर सवाल उठाने वाले लोगों को अपने पुराने कार्यकाल को भी याद करना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में गरीब और आम जनता की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
योगी आदित्यनाथ ने परिवारवाद को लेकर भी विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे ऊपर होती है और सरकार की जिम्मेदारी हर वर्ग के लिए समान रूप से काम करना है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्तमान सरकार बिना किसी भेदभाव के विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं। मुख्यमंत्री ने जहां अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े किए।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक वार यूपी की सियासत में एक और मुद्दा बनता नजर आ रहा है।


