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चोट के बावजूद Rishabh Pant का जलवा, MS Dhoni का रिकॉर्ड तोड़ रचा नया इतिहास

ऋषभ पंत ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा दिया है। चोट के बावजूद मैदान पर उतरकर पंत ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने उन्हें महान विकेटकीपर-बल्लेबाज एमएस धोनी से आगे पहुंचा दिया है। कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के दौरान पंत ने विदेशी और न्यूट्रल टेस्ट मैचों में बतौर भारतीय विकेटकीपर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

पंत ने जैसे ही 2,501 रन का आंकड़ा पार किया, उन्होंने एमएस धोनी के 2,496 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट में पंत के बढ़ते प्रभाव और विदेशी परिस्थितियों में उनके शानदार प्रदर्शन को दिखाती है।

विदेशी मैदानों पर टेस्ट क्रिकेट हमेशा भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। अलग परिस्थितियां, तेज गेंदबाजों की मदद करती पिचें और विकेट के पीछे लगातार जिम्मेदारी संभालना किसी भी विकेटकीपर-बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होता। इसके बावजूद पंत ने लगातार अपने प्रदर्शन से अलग पहचान बनाई है।

कोलंबो टेस्ट में यह उपलब्धि हासिल करने के समय पंत का विदेशी या न्यूट्रल टेस्ट मैचों में बल्लेबाजी औसत 41.68 का रहा। उनके नाम 2,501 रन दर्ज हो चुके हैं। इस आंकड़े के साथ उन्होंने धोनी को पीछे छोड़कर भारतीय विकेटकीपरों की इस खास सूची में पहला स्थान हासिल कर लिया।

एमएस धोनी का नाम भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल विकेटकीपर-बल्लेबाजों में लिया जाता है। लंबे समय तक विदेशी टेस्ट मैचों में बतौर विकेटकीपर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड उनके नाम रहा। अब पंत ने उस रिकॉर्ड को तोड़कर अपने करियर की एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।

इस रिकॉर्ड की खास बात यह भी है कि पंत ने इसे अपेक्षाकृत कम समय में हासिल किया है। टेस्ट क्रिकेट में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और मुश्किल परिस्थितियों में तेजी से रन बनाने की क्षमता ने उन्हें बाकी विकेटकीपरों से अलग पहचान दिलाई है।

भारतीय विकेटकीपरों की इस सूची में पंत और धोनी के बाद फारुख इंजीनियर का नाम आता है, जिन्होंने विदेशी या न्यूट्रल टेस्ट मैचों में 1,209 रन बनाए। इसके बाद सैयद किरमानी के 1,109 रन और किरण मोरे के 901 रन दर्ज हैं।

पंत की इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उनका करियर चोटों से भी प्रभावित रहा है। इसके बावजूद उन्होंने मैदान पर वापसी के बाद अपनी बल्लेबाजी की धार और आत्मविश्वास को बरकरार रखा है।

धोनी जैसे दिग्गज के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना किसी भी भारतीय क्रिकेटर के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। पंत ने यह रिकॉर्ड ऐसे समय में बनाया है, जब उनसे भारतीय टेस्ट टीम में एक अहम भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है।

अब पंत के सामने चुनौती इस रिकॉर्ड को और मजबूत करने की होगी। जिस तरह वह विदेशी परिस्थितियों में लगातार रन बना रहे हैं, उससे भारतीय टेस्ट क्रिकेट में उनके योगदान को आने वाले समय में और महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

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