फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 2027 में एक बार फिर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनके दोबारा चुनाव लड़ने की पुष्टि फीफा की ओर से की गई है। हालांकि, इस बार उनका चुनावी सफर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। नेतृत्व को लेकर बढ़ती आलोचना, कानूनी विवाद और कुछ यूरोपीय फुटबॉल संगठनों के विरोध के बीच इन्फेंटिनो के सामने अपने नेतृत्व की स्वीकार्यता साबित करने की बड़ी चुनौती होगी।
इन्फेंटिनो ने इसी साल अप्रैल में 2027 के चुनाव में उतरने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, हाल के दिनों में उनके नेतृत्व और फीफा की नीतियों को लेकर सवाल लगातार बढ़े हैं। खास तौर पर विश्व कप से जुड़े कमर्शियल अधिकारों को निजी निवेशकों के साथ साझा करने की योजनाओं ने विवाद को जन्म दिया। आलोचकों का आरोप है कि फीफा के प्रशासन और व्यावसायिक फैसलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
इन्फेंटिनो करीब एक दशक से विश्व फुटबॉल के सबसे ताकतवर पद पर हैं। साल 2016 में सेप ब्लाटर के इस्तीफे के बाद हुए फीफा सम्मेलन में उन्हें अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद 2019 और 2023 में भी वह निर्विरोध या मजबूत समर्थन के साथ अध्यक्ष पद पर बने रहे। लेकिन अब 2027 का चुनाव उनके लिए पहले की तुलना में अलग परिस्थिति लेकर आया है।
सबसे बड़ा विवाद उनके कार्यकाल की गणना को लेकर है। फीफा के नियमों के मुताबिक अध्यक्ष अधिकतम तीन चार-वर्षीय कार्यकाल पूरा कर सकता है। लेकिन इन्फेंटिनो का तर्क है कि 2016 में शुरू हुआ उनका पहला कार्यकाल पूर्ण चार साल का कार्यकाल नहीं था, क्योंकि उन्होंने बीच में छोड़े गए कार्यकाल को पूरा किया था। इसी व्याख्या के आधार पर वह 2027 में फिर से चुनाव लड़ने की पात्रता रखते हैं।
इस व्याख्या पर हालांकि उनके आलोचकों और कुछ अधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि इन्फेंटिनो के कार्यकाल की गणना अलग तरीके से की जानी चाहिए। कुछ लोगों ने फीफा की शासन, लेखा और अनुपालन से जुड़ी संस्थाओं के सामने उनकी उम्मीदवारी को रोकने की मांग भी की है। ऐसे में चुनाव से पहले ही उनका कार्यकाल और पात्रता बड़ा राजनीतिक तथा कानूनी मुद्दा बन चुका है।
इन्फेंटिनो को उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी करीबी को लेकर फुटबॉल जगत में बहस हुई है। 2026 विश्व कप से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान इन्फेंटिनो ने ट्रंप को फीफा शांति पुरस्कार दिया था। इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई और सवाल उठे कि क्या फीफा अध्यक्ष को राजनीतिक नेताओं से इतनी नजदीकी रखनी चाहिए।
इसके अलावा फीफा की कमर्शियल योजनाओं को लेकर भी विवाद सामने आया। पुरुष और महिला विश्व कप तथा क्लब विश्व कप से जुड़े अधिकारों को एक नई कंपनी में ट्रांसफर करने और उसमें निजी निवेशकों को शामिल करने की योजना पर कई सवाल उठे। इस प्रस्ताव से जुड़े निवेशक समूह का नेतृत्व अमेरिकी कारोबारी जोशुआ कुशनर कर रहे थे। बाद में इस योजना को वापस ले लिया गया, लेकिन इससे जुड़े विवादों का असर इन्फेंटिनो की छवि पर पड़ा।
मामला अब कानूनी मोर्चे तक भी पहुंच चुका है। यूरोपीय फुटबॉल संगठन ने अमेरिका की एक संघीय अदालत से फीफा से संबंधित दस्तावेज और अधिकारियों की गवाही हासिल करने की अनुमति मांगी थी। इसका इस्तेमाल स्विट्जरलैंड में इन्फेंटिनो और संभावित रूप से फीफा से जुड़े अन्य अधिकारियों या सलाहकारों के खिलाफ संभावित आपराधिक शिकायत से संबंधित कार्रवाई में किया जाना था।
फीफा ने इन आरोपों को खारिज किया है। संगठन का कहना है कि उसके खिलाफ बदनाम करने का अभियान चलाया जा रहा है। फीफा का यह भी तर्क है कि जब तक स्विट्जरलैंड या किसी अन्य देश में औपचारिक आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं हुई है, तब तक उसके आंतरिक दस्तावेजों की मांग का आधार कमजोर है।
अब निगाहें 18 मार्च 2027 पर टिकी हैं। इसी दिन मोरक्को की राजधानी रबात में फीफा कांग्रेस के दौरान अध्यक्ष पद का चुनाव होना है। अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को 18 नवंबर 2026 तक अपनी उम्मीदवारी घोषित करनी होगी। चुनाव में फीफा के सभी 211 सदस्य देशों को मतदान का अधिकार होगा और जीत के लिए कम से कम 106 वोट हासिल करना जरूरी होगा।
यानी इन्फेंटिनो के सामने सिर्फ चुनाव जीतकर एक और कार्यकाल हासिल करने की चुनौती नहीं है। उन्हें अपने कार्यकाल की वैधता, प्रशासनिक फैसलों, कानूनी विवादों और घटते समर्थन को लेकर उठ रहे सवालों का भी सामना करना होगा। अगर विरोध बढ़ता है और यूरोपीय फुटबॉल संघों का समर्थन कमजोर होता है, तो 2027 का चुनाव इन्फेंटिनो के राजनीतिक और प्रशासनिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है।


