ईरान ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने यमन के हूती समूह को ईरान का प्रॉक्सी बताया था। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी दावे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंसारल्लाह यानी हूती एक स्वतंत्र यमनी गुट है और वह अपने फैसले खुद लेता है। ईरान का कहना है कि हूती किसी दूसरे देश के आदेश पर काम नहीं करता और न ही किसी के लिए प्रॉक्सी के तौर पर काम कर रहा है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए मार्को रुबियो के आरोपों का जवाब दिया। बघाई ने कहा कि झूठे दावे तथ्यों की जगह नहीं ले सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंसारल्लाह यमन का एक स्वतंत्र गुट है, जो अपने राजनीतिक और सैन्य फैसले खुद लेने में सक्षम है। उनके मुताबिक, संगठन किसी बाहरी ताकत से आदेश प्राप्त नहीं करता।
बघाई ने अपने बयान में अमेरिका की क्षेत्रीय नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन अपनी सैन्य मौजूदगी और कथित वर्चस्ववादी नीतियों के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहा है। ईरानी अधिकारी ने कहा कि यमन में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए बाहरी हस्तक्षेप को खत्म करना जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के साथ-साथ यमन में हूती गतिविधियां भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा बनी हुई हैं। हूती समूह लंबे समय से यमन में एक प्रभावशाली राजनीतिक और सैन्य ताकत के रूप में मौजूद है। समूह का नाम अंसारल्लाह भी है और इसे यमन के गृहयुद्ध तथा क्षेत्रीय संघर्षों के संदर्भ में देखा जाता है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप रहा है कि ईरान हूती समूह को समर्थन देता है। इस समर्थन में हथियार, तकनीकी सहायता और अन्य संसाधनों की भूमिका को लेकर भी लंबे समय से दावे किए जाते रहे हैं। हालांकि ईरान लगातार हूतियों को सीधे नियंत्रित करने या उन्हें अपने आदेश पर चलाने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
अब मार्को रुबियो के प्रॉक्सी वाले बयान पर ईरान की तरफ से आई प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक तनाव को एक बार फिर उजागर कर दिया है। ईरान का कहना है कि यमन की स्थिति को समझने के लिए स्थानीय परिस्थितियों और वहां के राजनीतिक घटनाक्रम को ध्यान में रखना चाहिए, न कि हर गतिविधि को किसी बाहरी देश से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
बघाई ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि ईरान यमन में बाहरी सैन्य हस्तक्षेप को क्षेत्रीय अस्थिरता का प्रमुख कारण मानता है। उनके मुताबिक, अगर यमन में लंबे समय तक शांति स्थापित करनी है तो दूसरे देशों को वहां के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से बचना होगा।
वहीं अमेरिका की ओर से हूतियों और ईरान के संबंधों को लेकर अलग रुख सामने आता रहा है। यही मतभेद अब एक बार फिर सार्वजनिक बयानबाजी के रूप में सामने आया है। एक तरफ अमेरिका हूतियों को ईरान समर्थित समूह के तौर पर देखता है, जबकि तेहरान इस दावे को खारिज करते हुए उन्हें स्वतंत्र यमनी संगठन बताता है।
इस पूरे विवाद का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं है। यमन की स्थिति का संबंध लाल सागर और आसपास के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
फिलहाल ईरान ने साफ कर दिया है कि वह हूती समूह को अपना प्रॉक्सी मानने के अमेरिकी दावे को स्वीकार नहीं करता। इस्माइल बघाई के बयान के बाद अब निगाहें अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया पर हैं। सवाल यही है कि क्या वॉशिंगटन अपने प्रॉक्सी वाले आरोप पर कायम रहेगा या फिर ईरान के जवाब के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और ज्यादा तीखी होगी।


