अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ईरानी एयरलाइंस पर अमेरिकी पाबंदियों के बाद ईरान की ओर से अमेरिका को कथित तौर पर पांच दिनों की समय-सीमा देने की बात सामने आई है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में उसकी मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं की जाएगी। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका का समर्थन करने वाले देशों के जहाजों और विमानों को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी है।
ईरान की ओर से सामने आए बयान के अनुसार, अमेरिका के पास अपनी नीतियों में बदलाव करने और ईरान की शर्तों पर विचार करने के लिए पांच दिनों का समय है। ईरान का कहना है कि यदि इस अवधि में कोई समाधान नहीं निकला तो होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
इस चेतावनी का संबंध ईरानी एयरलाइंस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों से भी जोड़ा जा रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ लगातार आर्थिक और अन्य प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। इसके जवाब में ईरान भी कई मौकों पर अमेरिका को अपनी नीतियों के परिणाम भुगतने की चेतावनी देता रहा है। मौजूदा मामले में तेहरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिया गया कथित बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का अंतरराष्ट्रीय परिवहन होता है।
ईरानी अधिकारी मोहसिन रजाई का नाम भी इस चेतावनी के संदर्भ में सामने आया है। रजाई ईरान के वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों में शामिल रहे हैं। उनके बयान के अनुसार, जब तक वाशिंगटन ईरान की मांगों और शर्तों पर सहमति नहीं बनाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने का सवाल नहीं है। इस बयान से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान ने अमेरिका का साथ देने वाले देशों को भी चेतावनी दी है। ईरानी पक्ष की ओर से कहा गया है कि यदि कोई देश अमेरिका की कार्रवाई में शामिल होता है या ईरान के खिलाफ कदम उठाता है, तो उसके विमानों और समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर स्थिति गंभीर हो सकती है। हालांकि, ऐसी धमकियों के वास्तविक प्रभाव और उनके संभावित क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। यहां जहाजों की आवाजाही में बड़ी बाधा आने पर तेल की आपूर्ति, समुद्री परिवहन और वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से ईरान की ओर से इस जलमार्ग को लेकर दिया गया कोई भी बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखा जाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर विवाद चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव की आशंका भी समय-समय पर सामने आती रही है। ऐसे में पांच दिनों की कथित समय-सीमा ने इस तनाव को एक नया आयाम दे दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका ईरान की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी समाधान तक पहुंच पाते हैं।
फिलहाल ईरान की चेतावनी के बाद अगले पांच दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को लेकर स्थिति और जटिल हो सकती है। इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित न रहकर उन देशों पर भी पड़ सकता है जो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से ऊर्जा और व्यापारिक सामान का परिवहन करते हैं।


