दिल्ली में IIT के एक PhD छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में आखिरकार पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। दक्षिण दिल्ली के किशनगढ़ थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। छात्र मुनिरका गांव स्थित अपने किराए के मकान में संदिग्ध और अचेत अवस्था में मिला था। करीब 45 दिनों तक एम्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज चलने के बाद 3 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
मामला 18 अगस्त 2026 का है। बताया जा रहा है कि IIT दिल्ली में PhD की पढ़ाई कर रहा छात्र मुनिरका गांव में किराए के मकान में रहता था। उस दिन वह अपने कमरे के अंदर संदिग्ध हालत में मिला। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर आसपास के लोगों को स्थिति पर शक हुआ।
इसके बाद पड़ोसियों ने किसी तरह कमरे का दरवाजा खोला। अंदर छात्र अचेत अवस्था में पड़ा मिला। घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और छात्र को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
एम्स ट्रॉमा सेंटर में छात्र का लंबे समय तक इलाज चला। डॉक्टरों ने करीब 45 दिनों से ज्यादा समय तक उसका इलाज किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका। आखिरकार 3 अक्टूबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
छात्र की मौत के बाद मामले को लेकर कई सवाल खड़े हुए। परिवार की ओर से भी मामले की जांच की मांग की गई। आरोप है कि शुरुआती स्तर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संतोषजनक स्थिति नहीं बनी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। FIR दर्ज होने के बाद जांच को औपचारिक तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस अब उस दिन की घटनाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र के साथ वास्तव में क्या हुआ था।
जांच में CCTV फुटेज भी महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। पुलिस आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग को खंगाल रही है। इन फुटेज के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्र के कमरे तक कौन-कौन लोग पहुंचे थे और घटना से पहले तथा बाद में वहां क्या गतिविधियां हुई थीं।
CCTV फुटेज के अलावा पुलिस घटनास्थल से जुड़े अन्य सबूतों को भी जांच का हिस्सा बना रही है। कमरे की स्थिति, दरवाजा अंदर से बंद होने की परिस्थितियां और छात्र के वहां पहुंचने से लेकर अस्पताल ले जाए जाने तक की पूरी टाइमलाइन को जांचा जा रहा है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि घटना के समय छात्र के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। उसके मोबाइल फोन, आसपास के लोगों से पूछताछ और उपलब्ध अन्य जानकारियों के आधार पर घटनाक्रम को समझने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब जांच की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि, छात्र की मौत की वास्तविक वजह और उस दिन की परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। 18 अगस्त को छात्र के अचेत अवस्था में मिलने से लेकर 3 अक्टूबर को उसकी मौत तक का घटनाक्रम जांच का अहम हिस्सा है।
IIT दिल्ली के PhD छात्र की मौत ने परिवार और संस्थान से जुड़े लोगों के बीच भी चिंता पैदा की है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है कि CCTV और अन्य सबूतों से इस मामले में क्या जानकारी सामने आती है और छात्र की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।


