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बरेली में 8वीं पास बना डॉक्टर, इंस्टाग्राम पर बेच रहा था फर्जी शक्तिवर्धक दवाएं; 1.99 लाख कैश और 12 मोबाइल बरामद

बरेली जिले के इज्जतनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए फर्जी हर्बल और आयुर्वेदिक शक्तिवर्धक दवाएं बेचने वाले कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इनमें से एक आरोपी महज 8वीं कक्षा तक पढ़ा है, लेकिन सोशल मीडिया पर खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को शक्तिवर्धक दवाएं बेच रहा था।

पुलिस को इस पूरे नेटवर्क की जानकारी गुप्त सूचना के आधार पर मिली थी। सूचना के बाद इज्जतनगर पुलिस ने एक ठिकाने पर छापेमारी की। पुलिस के मुताबिक, यहां एक फर्जी कॉल सेंटर की तरह काम किया जा रहा था। आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे और खुद को डॉक्टर बताकर अलग-अलग तरह की हर्बल और आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री करते थे।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान समीरउद्दीन और यूसुफ के रूप में हुई है। आरोप है कि समीरउद्दीन खुद को डॉक्टर बताकर ग्राहकों से बातचीत करता था और उन्हें शक्तिवर्धक दवाएं उपलब्ध कराने का दावा करता था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी के पास डॉक्टर के तौर पर काम करने की कोई वैध योग्यता या लाइसेंस नहीं था।

बताया जा रहा है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए करते थे। ऑनलाइन बातचीत के जरिए लोगों को दवाओं के बारे में जानकारी दी जाती थी और फिर उनसे पैसे लेकर कथित तौर पर दवाएं भेजी जाती थीं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे और अब तक कितने ग्राहकों को ऐसी दवाएं बेची गईं।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.99 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। इसके अलावा 12 मोबाइल फोन और बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाएं भी बरामद की गई हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन और अन्य सामान की जांच कर रही है, ताकि आरोपियों के ऑनलाइन नेटवर्क और उनके संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक अन्य आरोपी इलियास खान मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद दवाएं कहां से लाई जाती थीं और इनके निर्माण, पैकिंग और सप्लाई से जुड़े लोग कौन हैं।

मामले में पुलिस अब बरामद दवाओं की जांच भी कराएगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि दवाओं में कौन-कौन से पदार्थ मौजूद हैं और क्या उन्हें किसी वैध कंपनी या निर्माता की ओर से तैयार किया गया था। यदि जांच में दवाएं नकली या मानकों के विपरीत पाई जाती हैं, तो आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।

इस कार्रवाई के बाद ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर डॉक्टर या विशेषज्ञ बनकर स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं बेचने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। खासतौर पर शक्तिवर्धक दवाओं के मामले में बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच के दौरान उनके बैंक लेनदेन, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और दवाओं की सप्लाई से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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